छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले स्थित प्रसिद्ध खल्लारी माता मंदिर में चैत्र नवरात्रि के दौरान बड़ा हादसा हो गया। रोपवे की ट्रॉली का केबल टूटने से 16 श्रद्धालु घायल हो गए, जबकि एक युवती की दर्दनाक मौत हो गई। घायलों में 4 की हालत गंभीर बताई जा रही है।
कैसे हुआ हादसा?
जानकारी के अनुसार, नवरात्रि के चौथे दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे थे। दर्शन के बाद कुछ लोग रोपवे ट्रॉली से नीचे उतर रहे थे, तभी अचानक केबल टूट गया।
केबल टूटते ही ट्रॉली अनियंत्रित होकर पहाड़ी से टकराई और उसमें बैठे श्रद्धालु करीब 20 फीट नीचे गिर गए। हादसा इतना जबरदस्त था कि ट्रॉली में बैठे लोगों को गंभीर चोटें आईं और एक युवती ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, एक के बाद एक दो ट्रॉली हादसे का शिकार हुईं। पहली ट्रॉली नीचे आते समय दुर्घटनाग्रस्त हुई, जबकि उसी दौरान ऊपर जा रही दूसरी ट्रॉली भी संतुलन खो बैठी और गिर गई।
दूसरी ट्रॉली में सवार लोगों को अपेक्षाकृत कम चोटें आईं, लेकिन पूरे मंदिर परिसर में अफरातफरी का माहौल बन गया।
तुरंत शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन
हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीणों और पुलिस ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को निजी वाहनों की मदद से नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया।
बताया जा रहा है कि ज्यादातर घायल रायपुर के रहने वाले हैं।
मेंटेनेंस में लापरवाही के आरोप
स्थानीय लोगों ने रोपवे के रखरखाव में भारी लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि समय-समय पर मेंटेनेंस नहीं होने के कारण यह हादसा हुआ।
चैत्र नवरात्रि के कारण मंदिर में भीड़ अधिक थी, ऐसे में सुरक्षा इंतजामों की कमी भी सवालों के घेरे में है।
कंपनी और कर्मचारियों पर FIR दर्ज
जिला प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। लापरवाही सामने आने पर मां खल्लारी देवी ट्रस्ट ने रोपवे संचालक कंपनी ‘रोप वे एवं रिसॉर्ट प्राइवेट लिमिटेड, कोलकाता’ और स्थानीय कर्मचारी बीरबल जंघेल व रामेश्वर यादव के खिलाफ खल्लारी थाने में FIR दर्ज कराई है।
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 173 के तहत सेक्शन 289 और 125 (a) में मामला दर्ज किया है। दोष सिद्ध होने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
खल्लारी माता मंदिर महासमुंद से करीब 25 किलोमीटर दूर एक पहाड़ी पर स्थित है। मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग 800 सीढ़ियां चढ़नी होती हैं।
हर साल चैत्र और क्वांर नवरात्रि में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, और चैत्र पूर्णिमा पर मेला भी आयोजित होता है।
बड़ा सवाल—जिम्मेदार कौन?
इस हादसे ने एक बार फिर धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था और मेंटेनेंस को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब देखना होगा कि जांच में क्या सामने आता है और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है।
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