ओंकारेश्वर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में शामिल हुईं राष्ट्रपति, सिकल सेल मुक्त भारत के संकल्प को मिली नई ऊर्जा
भोपाल/खंडवा। विश्व सिकल सेल दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश के खंडवा जिले स्थित पवित्र नगरी ओंकारेश्वर में राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन-2047 के तहत राज्य स्तरीय कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। उनके साथ राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उपमुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेंद्र शुक्ल भी उपस्थित रहे।
राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् और राष्ट्रगान जन गण मन के साथ हुई। इस अवसर पर सिकल सेल एनीमिया पर आधारित लघु फिल्म और जन-जागरूकता वीडियो का भी प्रदर्शन किया गया। मिशन में उत्कृष्ट कार्य करने वाली ग्राम पंचायतों और अधिकारियों को सम्मानित भी किया गया।
राष्ट्रपति बोलीं- समय से पहले पूरा हुआ स्क्रीनिंग लक्ष्य बड़ी उपलब्धि
अपने संबोधन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन के अंतर्गत देशभर में नवजात शिशुओं से लेकर 40 वर्ष तक की आयु के लगभग 7 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य समय से पहले पूरा किया जा चुका है, जो दुनिया में आनुवंशिक रोगों की जांच की सबसे बड़ी पहलों में से एक है।
उन्होंने मध्यप्रदेश की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश में अब तक 1 करोड़ 25 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग हो चुकी है और अधिकांश लोगों को जेनेटिक काउंसलिंग कार्ड भी प्रदान किए गए हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2023 में मध्यप्रदेश के शहडोल से राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन की शुरुआत की गई थी। इस मिशन का उद्देश्य केवल बीमारी का इलाज नहीं बल्कि जनजातीय स्वास्थ्य, जागरूकता, आनुवंशिक परामर्श और निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना है।
सिकल सेल उन्मूलन के लिए वैज्ञानिक और सामाजिक स्तर पर हो रहे प्रयास
राष्ट्रपति ने कहा कि इस मिशन की पृष्ठभूमि में आईसीएमआर, ट्राइबल हेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट, एम्स, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम), विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) सहित विभिन्न संस्थाओं द्वारा व्यापक अध्ययन किए गए हैं।
इन अध्ययनों से सामने आया कि भारत में लगभग 2 से 2.5 करोड़ लोग सिकल सेल जीन के वाहक हो सकते हैं और लाखों लोग इस रोग से प्रभावित हैं। इसका सबसे अधिक असर मध्य भारत के जनजातीय क्षेत्रों में देखने को मिलता है। इसी को ध्यान में रखते हुए देश के 17 राज्यों में सार्वजनिक स्वास्थ्य, जनजातीय कल्याण, जेनेटिक साइंस और डिजिटल मॉनिटरिंग को जोड़ते हुए यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
ढाई लाख मरीज और 20 लाख से अधिक वाहकों की हुई पहचान
राष्ट्रपति ने बताया कि मिशन मोड में चल रही स्क्रीनिंग के कारण देशभर में अब तक करीब 2.5 लाख सिकल सेल रोगियों और 20 लाख से अधिक वाहकों (कैरियर) की पहचान की जा चुकी है।
उन्होंने कहा कि सिकल सेल के वाहकों में बीमारी के लक्षण दिखाई नहीं देते, इसलिए कई बार उन्हें यह जानकारी नहीं होती कि यह आनुवंशिक विकार उनकी आने वाली पीढ़ी तक पहुंच सकता है। ऐसे में विवाह पूर्व जेनेटिक काउंसलिंग और समय पर जांच बेहद आवश्यक है।
मध्यप्रदेश के प्रयासों की राष्ट्रपति ने की प्रशंसा
राष्ट्रपति मुर्मु ने मध्यप्रदेश सरकार द्वारा गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और जनजातीय क्षेत्रों में संचालित विशेष स्क्रीनिंग अभियानों की सराहना की।
उन्होंने बताया कि “स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान” के तहत प्रदेश में 4 लाख से अधिक महिलाओं की सिकल सेल जांच की गई। वहीं दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से लगातार जांच और उपचार की सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। राष्ट्रपति ने सिकल मित्र अभियान की भी प्रशंसा की, जिसके तहत शासकीय एवं गैर-शासकीय संस्थाओं, स्वयंसेवी संगठनों और एनसीसी कैडेट्स को प्रशिक्षण देकर जागरूकता अभियान से जोड़ा गया है
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