पाकिस्तान की हार पर पर्दा डालने का नया नाटक: जनरल मुनीर बनाये गये फील्ड मॉर्शल !।

  • अयूब खान के बाद दूसरे फ़ील्ड मॉर्शल !

  • भारत से मिली करारी हार के बाद, पाकिस्तान ने अपनी पराजय को छुपाने के लिए एक और प्रोपेगैंडा का सहारा लिया है। जनरल आसिम मुनीर को फील्ड मार्शल के पद पर प्रमोट कर दिया गया है, जो हार के तुरंत बाद का एक असामान्य कदम है। इतिहास गवाह है कि पाकिस्तान 1965 और 1971 की लड़ाइयों में भी अपनी हार को जीत के रूप में पेश करता रहा है। अब, अपनी जनता के गुस्से से बचने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि सुधारने के लिए, पाकिस्तान यह नया नाटक कर रहा है। लेकिन क्या प्रमोशन से पराजय की सच्चाई बदली जा सकती है?

पाकिस्तान की पराजय छुपाने की परंपरा: इतिहास से वर्तमान तक

पाकिस्तान का इतिहास दर्शाता है कि उसने अपनी सैन्य पराजयों को स्वीकारने के बजाय उन्हें जीत के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। यह प्रवृत्ति विशेष रूप से भारत के साथ हुए युद्धों में स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है।

1965 का युद्ध: वास्तविकता बनाम प्रचार

1965 में, पाकिस्तान ने कश्मीर पर नियंत्रण पाने के उद्देश्य से भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ा। हालांकि, युद्ध के अंत में, पाकिस्तान अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में विफल रहा और उसे रणनीतिक और राजनीतिक रूप से नुकसान उठाना पड़ा। इसके बावजूद, पाकिस्तान ने इस युद्ध को अपनी जीत के रूप में प्रस्तुत किया और हर साल 6 सितंबर को ‘डिफेंस डे’ मनाता है। वास्तव में, यह युद्ध पाकिस्तान के लिए एक पराजय था, लेकिन सरकारी प्रचार ने इसे जनता के सामने एक विजय के रूप में पेश किया।

1971 का युद्ध: इतिहास का विकृतीकरण

1971 में, पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, पाकिस्तानी सेना ने वहां के नागरिकों पर अत्याचार किए, जिसके परिणामस्वरूप लाखों लोग मारे गए और बांग्लादेश का गठन हुआ। पाकिस्तानी सरकार ने इन घटनाओं को स्वीकारने से इनकार किया और आज तक आधिकारिक रूप से इन अत्याचारों के लिए माफी नहीं मांगी है। इतिहासकारों का मानना है कि पाकिस्तान अपनी पराजय को छुपाने के लिए इन घटनाओं को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करता रहा है।

कारगिल संघर्ष: सच्चाई से मुंह मोड़ना

1999 में कारगिल संघर्ष के दौरान, पाकिस्तानी सेना ने गुप्त रूप से भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की, लेकिन अंततः भारतीय सेना ने उन्हें पीछे हटने पर मजबूर किया। पाकिस्तान ने शुरू में इस ऑपरेशन में अपनी संलिप्तता से इनकार किया, लेकिन बाद में अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण इसे स्वीकार करना पड़ा। यह एक और उदाहरण है जहां पाकिस्तान ने अपनी पराजय को छुपाने का प्रयास किया।

2025 का संघर्ष: पराजय पर पर्दा डालने की नई कोशिश

हाल ही में, अप्रैल 2025 में कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद, भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों पर हमले किए। इन हमलों के परिणामस्वरूप पाकिस्तान को भारी नुकसान उठाना पड़ा। इसके बावजूद, पाकिस्तान ने अपनी पराजय को छुपाने के लिए जनरल आसिम मुनीर को फील्ड मार्शल के पद पर प्रमोट कर दिया, जो हार के तुरंत बाद का एक असामान्य कदम है। यह प्रमोशन पाकिस्तान की जनता के गुस्से से बचने और सेना की छवि सुधारने का प्रयास माना जा रहा है।

निष्कर्ष

पाकिस्तान का इतिहास दर्शाता है कि उसने बार-बार अपनी सैन्य पराजयों को स्वीकारने के बजाय उन्हें जीत के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। यह प्रवृत्ति न केवल ऐतिहासिक तथ्यों को विकृत करती है, बल्कि भविष्य में सुधार और आत्ममंथन की संभावनाओं को भी बाधित करती है। सच्चाई को स्वीकारना और इतिहास से सीखना ही एक राष्ट्र के लिए आगे बढ़ने का सही मार्ग है।

publicfirstnews.com

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