राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने विगत दिनों नागपुर में एक पुस्तक के विमोचन समारोह में मुख्य अतिथि की आसंदी से कहा है कि भारत की आजादी की उपलब्धि का श्रेय कोई एक व्यक्ति या कोई एक सिंगल इकाई नहीं ले सकती। यह असंख्य व्यक्तियों और समूहों के कार्यों का प्रतिफल है। आजादी का आंदोलन सामूहिक प्रकृति का आंदोलन था।1857 के विद्रोह से स्वतंत्रता आंदोलन का जन्म हुआ। उस समय जो लौ उठी वह बुझने नहीं पाई। संघ प्रमुख ने इसी सामूहिक सोच को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नीतियों और कार्यक्रमों का आधार बताते हुए कहा कि संघ में कोई एक व्यक्ति निर्णय नहीं लेता। सभी निर्णय सामूहिक विचार विमर्श से तय होते हैं।


मोहन भागवत ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संघ की दिशा सामूहिक निर्णय प्रक्रिया से तय होती है। संघ का काम एक या दो व्यक्तियों द्वारा संचालित नहीं होता है। संघ जो कुछ भी करता या कहता है वह आम सहमति का परिणाम ह़ोता है। उन्होंने संघ में सामान्य स्वयंसेवक को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि संघ में सामान्य स्वयंसेवक का पद ही सर्वोच्च होता है। संघ में एक व्यक्ति नहीं पूरा संघ निस्वार्थ भाव से लोगों की सेवा करता है। संघ कार्यकर्ता सामान्य जीवन जीते हैं और सामाजिक उत्थान के लिए प्रयास करते हुए अपने कार्यों से असाधारण ऊंचाई प्राप्त करते हैं।वे जानते हैं कि समाज को उस मुकाम तक पहुंचना चाहिए।संघ के स्वयंसेवक बिना किसी पहचान अथवा प्रशंसा के बिना सहजता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं।

मोहन भागवत ने संघ के कार्यकर्ताओं की सेवा भावना को उनकी स्वभावगत विशेषता बताते हुए कहा कि उन्हें अच्छा काम करने के लिए कोई अतिरिक्त विशेष प्रयास नहीं करना पड़ता। वे सारे अच्छे काम सहजता से करते हैं। संघ प्रमुख ने कहा कि जो लोग संघ को समझने के लिए समय निकालते हैं वे अक्सर यह कहते हैं कि वे संघ से बहुत प्रभावित हैं और उन्होंने बहुत कुछ सीखा है।
संघ प्रमुख ने कहा कि पहलगाम में आतंकियों द्वारा की गई कायरतापूर्ण वारदात के बाद भारतीय सेना ने आतंकियों के खिलाफ जो कार्रवाई की वह सराहनीय है। संघ प्रमुख ने अपनी इस बात पर विशेष जोर दिया कि उस समय देश के राजनीतिक दलों ने जो आपसी सहयोग और एकता बनाए रखी वह हमेशा कायम रहनी चाहिए।


संघ प्रमुख मोहन भागवत ने रामचंद्र देवतारे द्वारा लिखित पुस्तक ‘संघ जीवन’ के विमोचन समारोह में मुख्य अतिथि की आसंदी से संघ की कार्यप्रणाली पर विस्तार से चर्चा करते हुए आगे कहा कि यह पुस्तक रामचंद्र देवतारे के प्रत्यक्ष अनुभवों पर आधारित है। पुस्तक बहुत ही सहज सरल भाषा में लिखी गई है जिसमें कृतज्ञता के भाव की अनुभूति होती है। गौरतलब है कि इस पुस्तक को दो भागों में प्रकाशित किया गया है। संघ प्रमुख ने पुस्तक की विषय वस्तु की सराहना करते हुए हुए उसे सबके लिए पठनीय बताया। दो भागों में प्रकाशित रामचंद्र देवतारे की इस पुस्तक को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गौरवशाली इतिहास, उसकी अनूठी कार्यप्रणाली, संघ के कार्यों को निकट से देखने समझने के लिए एक प्रामाणिक ग्रंथ माना जा सकता है।

  • कृष्णमोहन झा

(लेखक राजनैतिक विश्लेषक )

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