HIGHLIGHT FIRST

  • सिलीसेढ़ लेक क्षेत्र में बोरिंग योजना के विरोध में किसानों का आंदोलन तेज।
  • बीते 20 दिनों से लगातार धरने पर बैठे किसान।
  • 500 ट्रैक्टरों का काफिला लेकर किसानों ने गुरुवार को किया शहर में प्रवेश का प्रयास।
  • 18 थानों की पुलिस तैनात, अहिंसा सर्किल पर किसानों को रोका गया।
  • अलवर–जयपुर और डाडीकर रोड बंद, किसानों ने सड़क पर बैठकर खाया भोजन।

राजस्थान के अलवर जिले की सिलीसेढ़ लेक एरिया में प्रस्तावित बोरिंग परियोजना को लेकर किसानों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। लगभग 20 दिन से आंदोलनरत किसान गुरुवार को अपने 500 ट्रैक्टरों के काफिले के साथ शहर की ओर रवाना हुए। लेकिन पुलिस ने उन्हें अहिंसा सर्किल पर ही रोक दिया।

सुरक्षा की दृष्टि से जिला प्रशासन ने यहां 18 थानों की पुलिस तैनात की है और अलवर–जयपुर रोड (उमरैन मार्ग) और अलवर–डाडीकर रोड को भी बंद कर दिया गया है। आंदोलनकारियों ने अलवर–उमरैन मार्ग पर ही सामूहिक रूप से भोजन कर विरोध जताया।

इससे पहले गुरुवार सुबह किसान नेताओं और प्रशासन के बीच बातचीत बेनतीजा रही। किसानों की मुख्य मांग है कि सिलीसेढ़ झील के आसपास बोरिंग का कार्य रोका जाए।

क्या है विवाद?

अलवर शहर की जल आपूर्ति के लिए 30 नए बोरिंग स्वीकृत किए गए हैं, जो सिलीसेढ़ झील के आसपास खोदे जाने हैं। इस योजना का शिलान्यास मुख्यमंत्री ने 20 मई को किया था, और इसके लिए बजट भी जारी हो चुका है।

लेकिन स्थानीय किसानों का कहना है कि यदि बोरिंग हुई तो उनकी जमीन का भूजल स्तर नीचे चला जाएगा, जिससे सिंचाई की संभावनाएं खत्म हो जाएंगी। उनका कहना है कि यह योजना उनकी खेती-बाड़ी और जीवन पर संकट बनकर आएगी।

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