पब्लिक फर्स्ट । भोपाल । आलेख ।

कृष्णमोहन झा ।
लेखक : राजनितिक विश्लेषक

स्थान: सोलापुर

अवसर: उद्योगवर्धिनी के 21वें स्थापना दिवस पर मोहन भागवत का संबोधन

महिला सशक्तिकरण के लिए रुढ़ियों से मुक्ति ज़रूरी – मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने सोलापुर में आयोजित उद्योगवर्धिनी के 21वें स्थापना दिवस समारोह में महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर बेहद अहम और विचारोत्तेजक बयान दिया।

उन्होंने कहा कि महिलाओं को पारंपरिक रुढ़िवादी बंधनों से मुक्त कर, समाज को उन्हें स्वतंत्र रूप से अपने गुणों और क्षमताओं को विकसित करने का अवसर देना चाहिए।

भागवत के मुख्य वक्तव्य:

  • “अगर हम वास्तव में महिला सशक्तिकरण के समर्थक हैं, तो हमें उन्हें पुराने रीति-रिवाजों की बेड़ियों से मुक्त करना होगा।”
  • “महिलाओं में वह गुण होते हैं जो पुरुषों में नहीं। उनके पास वह सब कुछ करने की सामर्थ्य है जो पुरुष कर सकते हैं।”
  • “महिला केवल काम ही नहीं करती, वह पूरे परिवार और आने वाली पीढ़ियों को दिशा देती है।”

मातृशक्ति के सम्मान की बात:

मोहन भागवत ने कहा कि ईश्वर ने महिलाओं को एक अतिरिक्त विशेषता दी है जिससे वे वह कर सकती हैं, जो पुरुष नहीं कर पाते। उन्होंने यह भी जोड़ा कि महिलाएं पुरुषों के बराबर हैं, इसलिए उन्हें भी वही अवसर और सम्मान मिलना चाहिए।

भारत को विश्वगुरु बनाना है तो…

संघ प्रमुख ने साफ कहा कि अगर हमें भारत को विश्वगुरु बनाना है, तो पुरुषों के समान ही महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी।

उद्योगवर्धिनी की सराहना:

उन्होंने महिला सशक्तिकरण की दिशा में कार्यरत ‘उद्योगवर्धिनी’ संगठन की सराहना की, जो महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक विकास में अहम भूमिका निभा रहा है।

निष्कर्ष:

मोहन भागवत का यह बयान साफ दर्शाता है कि संघ नेतृत्व अब महिला सशक्तिकरण को केवल ‘संस्कृति’ या ‘संरक्षण’ तक सीमित नहीं रखकर, उसे स्वतंत्रता और समानता से जोड़कर देखने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

publicfirstnews.com

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