पब्लिक फर्स्ट। उज्जैन। अमृत बैंडवाल ।
कालजयी नगरी उज्जैन में सोमवार को द्वितीय वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन कॉन्क्लेव “रूहMantic” का भव्य आयोजन हुआ। इस कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि और केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। एक निजी होटल में आयोजित इस कार्यक्रम में देश-विदेश से आए 300 से अधिक आध्यात्मिक गुरु, विचारक और विशेषज्ञों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की मुख्य बातें
आध्यात्मिक पर्यटन का विकास
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि मध्य प्रदेश अब धार्मिक पर्यटन में राजस्थान से आगे निकल चुका है। उज्जैन जैसे पवित्र नगर इस विकास की धुरी बनते जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री का संबोधन
- डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन को काल की नगरी बताते हुए कहा – “यह भारत का समय है और आत्मा के विकास के लिए भारत से बेहतर कोई जगह नहीं।”
- उन्होंने बताया कि महाकाल मंदिर परिसर लगभग 1000 बीघा क्षेत्र में भक्तों के लिए विकसित किया गया है, जो भारतीय संस्कृति की आत्मा को दर्शाता है।
- मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि मेडिकल कॉलेज, हॉस्टल और वृद्धाश्रम जैसी सेवाओं को पर्यटन से जोड़ना चाहिए, ताकि आध्यात्मिकता और समाज सेवा एक साथ आगे बढ़ सकें।
संस्कृति और सेवा
डॉ. यादव ने कहा कि “भोजन” शब्द यहां भोग और प्रसाद की परंपरा से जुड़ा है, जो भारतीय संस्कृति का अद्वितीय स्वरूप है।
उन्होंने अहिल्या माता के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी धरोहर ने सनातन संस्कृति को अमर बना दिया है।
कॉन्क्लेव में हुई चर्चाएं
कॉन्क्लेव में विभिन्न सत्रों में इन विषयों पर गहन चर्चा हुई
- ज्योतिर्लिंग सर्किट और मंदिर अर्थव्यवस्थाएं
- उज्जैन की आध्यात्मिक शक्ति एवं शहरी भविष्य
- योग और ध्यान का प्रसार
- डिजिटल तकनीक से आध्यात्मिकता को सुलभ बनाना
महाकाल दर्शन के साथ समापन
कॉन्क्लेव का समापन महाकालेश्वर और काल भैरव मंदिर दर्शन के साथ हुआ। यह आयोजन मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करने और उज्जैन को वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन के केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हुआ।
