HIGHLIGHTS:
- कौन कौन सरकारी अधिकारी है शामिल ?
- बेनक़ाब होगा सिस्टम या होगी लीपापोती ?
देश की महत्वाकांक्षी भारत माला परियोजना, जिसका उद्देश्य तेज़ और सुरक्षित सड़क कनेक्टिविटी था, अब पब्लिक टैक्स मनी के कथित दुरुपयोग के आरोपों में घिर गई है।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोमवार को छत्तीसगढ़ के रायपुर और महासमुंद में 9 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई रायपुर-विशाखापत्तनम इकोनॉमिक कॉरिडोर के तहत भूमि अधिग्रहण में मुआवज़ा वितरण से जुड़े कथित घोटाले की जांच से संबंधित है।
किन-किन ठिकानों पर कार्रवाई
ED की टीमें सुबह रायपुर के लॉ-विस्टा सोसाइटी में हरमीत सिंह खनूजा के आवास सहित उनके सहयोगियों, सरकारी अधिकारियों और भूमि मालिकों के ठिकानों पर पहुंचीं।
महासमुंद के मेघ बसंत क्षेत्र में होंडा शोरूम मालिक जसबीर सिंह बग्गा के घर पर भी तलाशी ली गई।
₹32 करोड़ के गबन का आरोप
छत्तीसगढ़ EOW के अनुसार, भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में कम से कम ₹32 करोड़ की अनियमितता सामने आई है।
ED इस पूरे मामले को मनी लॉन्ड्रिंग के दृष्टिकोण से देख रही है, जिसमें फर्जी दस्तावेज, संदिग्ध भुगतान और बैंक ट्रांजैक्शन शामिल हो सकते हैं।
जनता का पैसा, जनता का सवाल
यह मामला सिर्फ आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि पब्लिक टैक्स मनी और समय की बर्बादी का भी है।
सवाल उठ रहे हैं कि —
• मुआवज़ा किन मानकों पर तय हुआ?
• लाभ किसे और किसके निर्देश पर मिला?
• क्या सरकारी तंत्र की मिलीभगत थी?
जांच जारी
फिलहाल कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है और न ही ED की ओर से आधिकारिक बयान आया है।
हालांकि, जांच एजेंसियों का संकेत है कि आने वाले दिनों में बड़े खुलासे हो सकते हैं।
PUBLIC FIRST इस मामले पर नज़र बनाए रखेगा।
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