Indore News: मध्यप्रदेश के इंदौर में एक बार फिर सिस्टम की लापरवाही ने एक मासूम की जान ले ली। चंदन नगर थाना क्षेत्र के नगीन नगर में 9 साल का बच्चा गोविंद हाईटेंशन बिजली लाइन की चपेट में आ गया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना ने बिजली विभाग और नगर निगम की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पतंग उतारते वक्त हुआ हादसा

रविवार शाम गोविंद एक बिजली के पोल पर पतंग उतारने चढ़ा था। इसी दौरान वह खुले हाईटेंशन तार के संपर्क में आ गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक तेज धमाके और पटाखों जैसी आवाज सुनाई दी। बच्चा लाइन से चिपक गया। स्थानीय लोगों ने जान जोखिम में डालकर उसे नीचे उतारा और तुरंत एमवाय अस्पताल पहुंचाया।

70 फीसदी झुलसने के बाद मौत

डॉक्टरों के अनुसार गोविंद करीब 70 प्रतिशत तक झुलस चुका था। गंभीर हालत में भर्ती बच्चे ने सोमवार सुबह इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। गोविंद के पिता मनीष मिस्त्री का काम करते हैं और मां प्रीति पटेल गृहिणी हैं। परिवार मूल रूप से विदिशा का रहने वाला है और इंदौर में किराए के मकान में रह रहा था।

पहले भी जा चुकी है एक जान

यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले धार रोड इलाके में भी 12 साल का बच्चा हाईटेंशन लाइन की चपेट में आकर जान गंवा चुका है। उस मामले में भी सिर्फ मर्ग दर्ज कर औपचारिकताएं पूरी कर दी गई थीं। न लाइनें हटाई गईं, न सुरक्षा इंतजाम किए गए।

रिहायशी इलाकों में खुले हाईटेंशन तार क्यों?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि रिहायशी इलाकों में खुले और असुरक्षित हाईटेंशन तार आखिर किसकी अनुमति से लगे हैं?
• क्या बिजली विभाग को खतरे की जानकारी नहीं थी?
• नगर निगम ने अब तक इन्हें शिफ्ट क्यों नहीं कराया?
• चेतावनी बोर्ड और सेफ्टी कवर कहां हैं?

Public First सवाल उठाता है

Public First मानता है कि इसे अब “दुर्घटना” कहना सच को छिपाने जैसा है। जब खतरा पहले से मौजूद था और फिर भी उसे नहीं हटाया गया, तो यह प्रशासनिक लापरवाही से हुई मौत है।

इंतज़ार किसका?

अगर अब भी हाईटेंशन लाइनों को सुरक्षित नहीं किया गया, तो अगली मौत भी तय है। सवाल यह है कि प्रशासन किस हादसे का इंतज़ार कर रहा है? अगली फाइल का? अगली मर्ग का?

Public First मांग करता है कि:

• रिहायशी इलाकों से हाईटेंशन लाइनें तुरंत हटाई जाएं
• जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो
• भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए ठोस नीति बनाई जाए

क्योंकि बच्चों की जान कोई आंकड़ा नहीं होती।

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