धार्मिक नगरी प्रयागराज में आज से 5 दिवसीय पंचकोसी परिक्रमा की शुरुआत हो रही है। यह परंपरागत धार्मिक यात्रा अपने विशिष्ट आस्था और धार्मिक महत्व के कारण हर वर्ष श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहती है। इस बार यह परिक्रमा 5 जनवरी, 2026 से प्रारंभ होगी और इसके आयोजन को लेकर प्रशासन तथा धार्मिक समुदायों ने व्यापक तैयारियाँ पूरी कर ली हैं।
संगम स्नान के साथ शुरू होगी यात्रा
पंचकोसी परिक्रमा कार्यक्रम की शुरुआत त्रिवेणी संगम में संगम स्नान के साथ होगी, जहाँ भक्त और साधु‑संत अपनी आस्था के चलते पवित्र गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम में दिव्य स्नान करेंगे। संगम स्नान को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है और माना जाता है कि इससे पापों का नाश और आत्मिक शुद्धि होती है।
अखाड़ा परिषद और साधु‑संतों की मौजूदगी
इस परिक्रमा में अखाड़ा परिषद के संत और साधु‑महंत प्रमुख रूप से शामिल होंगे। वे संभ्रांत धार्मिक रीतियों के साथ परिक्रमा पथ का भ्रमण करेंगे और प्रमुख तीर्थों पर दर्शन‑पूजन और पूजा‑अर्चना का आयोजन करेंगे।
पंचकोसी परिक्रमा के दौरान साधु‑संत और श्रद्धालु कई प्रमुख धार्मिक स्थलों का भ्रमण करेंगे, जिनमें शामिल हैं:
- अक्षय वट दर्शन — धार्मिक मान्यता का पवित्र वट वृक्ष
- लेटे हनुमान मंदिर में दर्शन — परिक्रमा मार्ग के प्रमुख मंदिरों में से एक
- दत्तात्रेय मंदिर — श्रद्धा का अनिवार्य स्थान
- सरस्वती कूप — आध्यात्मिक शुद्धि का स्थल
- रामघाट — परिक्रमा की अंतिम सांस्कृतिक और धार्मिक पड़ाव
ये स्थल धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और यहाँ पूजा‑अर्चना तथा ध्यान का विशेष महत्व है।
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