धर्म नगरी उज्जैन में इन दिनों एक अहम धार्मिक और सामाजिक मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है। देश के चार धाम मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने के फैसले के बाद अब यह मांग देश के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों तक भी पहुंचने लगी है। इसी कड़ी में भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन में भी गैर-हिंदुओं के मंदिर प्रवेश को लेकर विचार-मंथन शुरू हो गया है।

उज्जैन को शिव नगरी कहा जाता है, जहां भगवान स्वयं ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर के रूप में विराजमान हैं। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन एक से दो लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इन श्रद्धालुओं में देश-विदेश से आने वाले सभी धर्मों के लोग शामिल रहते हैं। लेकिन अब इस परंपरा को लेकर सवाल उठने लगे हैं कि क्या गैर-हिंदुओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं।

इस मुद्दे पर अखिल भारतीय पुजारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और महाकाल मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने खुलकर अपनी राय रखी है। उनका कहना है कि मंदिरों की पवित्रता, मर्यादा और सनातन परंपराओं की रक्षा के लिए कुछ प्रतिबंध आवश्यक हैं। महेश शर्मा के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति हमारे देवताओं, हमारी संस्कृति और हमारी धार्मिक मान्यताओं को नहीं मानता है और उसका आचरण सनातन परंपरा के अनुकूल नहीं है, तो ऐसे लोगों को मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि देश के चार धाम मंदिरों और हिमाचल प्रदेश के 42 मंदिरों में पहले ही गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर व्यवस्था लागू की जा चुकी है। ऐसे में 12 ज्योतिर्लिंगों सहित अन्य प्रमुख मंदिरों में भी इसी तरह की व्यवस्था होनी चाहिए। उनका मानना है कि हर समुदाय की अपनी पूजा पद्धति और धार्मिक परंपराएं होती हैं, और जब उन परंपराओं का पालन नहीं होता, तब वहां प्रतिबंध लगाया जाना पूरी तरह उचित है।

वहीं, इस विषय पर विश्व हिंदू परिषद के प्रांत प्रमुख महेश तिवारी ने भी सख्त रुख अपनाया है। उनका कहना है कि सनातन परंपरा में कुछ निश्चित मर्यादाएं होती हैं और गैर-हिंदुओं के मंदिर में प्रवेश से इन मर्यादाओं का पालन नहीं हो पाता, जिससे कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न होती हैं। उन्होंने मांग की कि जिस तरह चार धाम समिति ने गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर प्रस्ताव पारित कर शासन को भेजा है, उसी तरह का प्रस्ताव देश के हर बड़े मंदिर के लिए बनाया जाना चाहिए।

महेश तिवारी ने विशेष रूप से महाकाल मंदिर का उल्लेख करते हुए कहा कि यह 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख है, इसलिए यहां इस तरह की रोक और भी ज़रूरी हो जाती है। उनका यह भी कहना है कि मंदिरों की सुरक्षा के लिहाज़ से भी यह कदम आवश्यक है। साथ ही उन्होंने उज्जैन को पूर्ण रूप से पवित्र नगरी घोषित करने और यहां मांस-मदिरा व मांसाहार से जुड़ी दुकानों पर प्रतिबंध लगाने की मांग भी रखी।

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