पीड़ित की मां चक्कर खाकर गिरी, लहूलुहान युवक को नहीं मिली सुनवाई, ग्रामीणों में आक्रोश
टीकमगढ़ (मध्य प्रदेश):
जिले में प्रशासनिक निष्पक्षता और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। एक आदिवासी परिवार ने खनिज विभाग से जुड़े एक कर्मचारी और उसके साथियों पर बेरहमी से मारपीट, जातिगत गालियां देने, जान से मारने की धमकी देने और पुलिस के जरिए दबाव बनाकर जबरन राजीनामा कराने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले को लेकर पीड़ित परिवार ने पुलिस अधीक्षक के नाम अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है।
ज्ञापन के अनुसार, पीड़ित महिला और उसका पुत्र अनुसूचित जनजाति वर्ग से हैं। आरोप है कि 6 फरवरी 2026 को सुबह करीब 10:30 बजे, ग्राम मिनोरा टोरिया (थाना कोतवाली टीकमगढ़ क्षेत्र) में खनिज विभाग से जुड़े कर्मचारी कुलदीप जैन अपने साथियों के साथ वाहन से पहुंचे और वहां मौजूद चंदू सौर तथा एक नाबालिग युवक के साथ गाली-गलौज करने लगे। जब पीड़ित पक्ष ने इसका विरोध किया, तो आरोपियों ने डंडों और हाथों से जमकर मारपीट की। मारपीट में दोनों युवकों को सिर, पीठ और हाथों में गंभीर चोटें आईं, जबकि एक युवक के सिर से खून बहने लगा। आरोप है कि हमले के बाद आरोपियों ने खुलेआम जान से मारने की धमकी भी दी। घटना के दौरान पीड़ित युवक की मां की तबीयत बिगड़ गई और वह चक्कर खाकर गिर पड़ी।
मामले को और गंभीर बनाते हुए पीड़ित परिवार ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि शिकायत लेकर पुलिस चौकी और थाना कोतवाली पहुंचने पर प्रभावशाली आरोपियों के चलते एफआईआर दर्ज नहीं की गई। उल्टा पुलिस द्वारा दबाव बनाकर राजीनामा कराने की कोशिश की गई। परिवार का दावा है कि राजीनामा का वीडियो बनवाया गया और खाली कागजों पर जबरन हस्ताक्षर व अंगूठा निशान भी लिया गया।
घायल युवक को जिला अस्पताल टीकमगढ़ में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है। डॉक्टरों द्वारा एक्स-रे और सीटी स्कैन कराए गए हैं। परिजनों का कहना है कि युवक अब भी सामान्य स्थिति में नहीं है और काम करने में असमर्थ है। सबसे बड़ा आरोप यह है कि शिकायत के बावजूद आरोपियों पर कार्रवाई नहीं हुई, बल्कि पीड़ित पक्ष पर ही मामला दर्ज कर दिया गया। इससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है और खनिज विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया गया है।
पीड़ित परिवार ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज किया जाए और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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