आजाद नगर में शहीद चंद्रशेखर आजाद की कुटिया को नया स्वरूप दिया गया है। वर्ष 2011-12 में बना आजाद स्मृति मंदिर अब और भी भव्य हो गया है। यहां सात फीट ऊंची अष्ट धातु की आजाद प्रतिमा स्थापित की गई है। आजाद मैदान में 14 फीट की प्रतिमा और लगभग 5 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित आजाद स्मृति उपवन इस महान शहीद को याद करने का अद्वितीय स्थल बन चुका है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी 2016 में इस स्मारक में पहले प्रधानमंत्री के रूप में पहुंचे और शहीद आजाद के प्रति सम्मान प्रकट किया।

चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को हुआ और उन्होंने 27 फरवरी 1931 तक अपने जीवन को साहस, दृढ़ इच्छाशक्ति और राष्ट्रप्रेम के लिए समर्पित किया। उन्होंने युवा साथियों का नेतृत्व किया और स्वतंत्रता संग्राम में उनका मार्गदर्शन किया। काकोरी कांड (1925) में उनकी रणनीति और नेतृत्व आज भी क्रांतिकारी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

आजाद के जीवन से हमें यह सीख मिलती है कि विपत्तियों और संकटों से डरना नहीं चाहिए। चाहे बनारस में शिक्षा का समय हो, रामराजा नगरी ओरछा में ब्रह्मचारी जीवन, या फिर स्वतंत्रता संग्राम में संघर्ष — आजाद हर स्थिति में अदम्य साहस दिखाते रहे। 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में ब्रिटिश पुलिस द्वारा घेरा जाने पर उन्होंने अपने जीवन की आखिरी गोली चलाकर भारत माता की जय कहकर अपने प्राणों का बलिदान दिया।

नई पीढ़ी के लिए आजाद का जीवन प्रेरणा है। उनके साहस, अनुशासन और समर्पण को समझकर ही हम स्वतंत्रता की कीमत जान सकते हैं। पढ़ाई के साथ-साथ उनके जज्बे और आदर्श को अपनाना हर युवा के लिए आवश्यक है।

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