Close Menu
Public First News
  • Bharat first
  • Crime first
  • Politics first
  • Education first
  • Panchayat first
  • Sanatan first
  • Sanskriti first
  • Youth first
  • Live Tv

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

What's Hot
CG FIRST By Public First News

#CG FIRST | गंज चौक में हंगामा करने वाला आदतन आरोपी गिरफ्तार, कोतवाली पुलिस ने भेजा जेल |

May 27, 2026 CG FIRST
CG FIRST By Public First News

#CG FIRST | दुर्ग में “फेक मैरिज इवेंट” पर बवाल, हिंदू संगठनों का विरोध तेज |

May 27, 2026 CG FIRST
CG FIRST By Public First News

#CG FIRST | धमतरी में मंदिर चोरी पर पुलिस अलर्ट, एसपी ने ली हाई लेवल बैठक |

May 27, 2026 CG FIRST
Advertisement
Facebook X (Twitter) Instagram
Thursday, May 28
Facebook X (Twitter) Instagram YouTube RSS
Public First News
Breaking News:
  • #CG FIRST | गंज चौक में हंगामा करने वाला आदतन आरोपी गिरफ्तार, कोतवाली पुलिस ने भेजा जेल |
  • #CG FIRST | दुर्ग में “फेक मैरिज इवेंट” पर बवाल, हिंदू संगठनों का विरोध तेज |
  • #CG FIRST | धमतरी में मंदिर चोरी पर पुलिस अलर्ट, एसपी ने ली हाई लेवल बैठक |
  • #CG FIRST | नुकीली कीलों के झूले पर बैठे कुमार जयदेव, जलनी माता जात्रा में दिखी अद्भुत आस्था |
  • #ABVP | महाप्रभु जगन्नाथ की पावन धरा भुवनेश्वर में अभाविप की एक-दिवसीय केंद्रीय कार्यसमिति बैठक संपन्न |
  • #MP FIRST | विश्व धरोहर खजुराहो में “योग महोत्सव 2026” का आयोजन, CM डॉ. मोहन यादव ने किया वर्चुअल संबोधन |
  • #FRIENDSHIP FIRST | सोशल मीडिया से पहले वाली दोस्ती- एक फोन कॉल और लौट आई 50 साल पुरानी दोस्ती | जानिए अजब दोस्तों की ग़ज़ब कहानी ।
  • #MP FIRST | भिंड में सांप को कुचलकर हत्या का वीडियो वायरल, वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, आरोपी गिरफ्तार |
  • #MP FIRST | नई दिल्ली में CM डॉ. मोहन यादव और नितिन नबीन की महत्वपूर्ण मुलाकात, संगठन और विकास मुद्दों पर चर्चा |
  • #MP FIRST | सीएम डॉ. यादव ने बहनों को फ्री में बांटी ई-साइकिलें, बोले- वैश्विक संकट में दौर में ईवी सबसे अच्छा विकल्प |
Login
  • Bharat first
  • Crime first
  • Politics first
  • Education first
  • Panchayat first
  • Sanatan first
  • Sanskriti first
  • Youth first
  • Live Tv
Facebook X (Twitter) Instagram YouTube RSS
Public First News
Home»ECCONOMIC»“प्राकृतिक संसाधन: सृष्टि की साझा धरोहर, मानवता का नैतिक ट्रस्टीशिप दायित्व” – कैलाश चन्द्र |
ECCONOMIC

“प्राकृतिक संसाधन: सृष्टि की साझा धरोहर, मानवता का नैतिक ट्रस्टीशिप दायित्व” – कैलाश चन्द्र |

पब्लिक फर्स्ट | भोपाल | कैलाश चन्द्र
Public First NewsBy Public First NewsMarch 24, 2026No Comments0 Views
Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Telegram Tumblr Email
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

पृथ्वी पर उपलब्ध प्राकृतिक संसाधन—जल, वायु, वन, खनिज, मिट्टी, जीव–जंतु और ऊर्जा-स्रोत—मानवता की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि की साझा धरोहर हैं। यह विचार मात्र नैतिक आग्रह नहीं है; यह पृथ्वी के भूगर्भीय इतिहास, जैविक विकास और आधुनिक वैज्ञानिक समझ का गहन निष्कर्ष है। विज्ञान बताता है कि जिन ऊर्जा-स्रोतों पर आधुनिक सभ्यता खड़ी है, वे मानव जीवन के पैमाने पर अनुत्पादनीय हैं। पेट्रोलियम को बनने में 5 से 30 करोड़ वर्ष, कोयले को बनने में 3 से 40 करोड़ वर्ष, और प्राकृतिक गैस को बनने में करोड़ों वर्षों का समय लगता है। पृथ्वी की विशाल प्रयोगशाला ने जिस संसाधन को करोड़ों वर्षों में गढ़ा, उसे हम कुछ महीनों के युद्धों, संघर्षों या लालच से नष्ट कर दें—यह न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से मूर्खता है बल्कि नैतिक दृष्टि से अत्याचार भी।


भारतीय चिंतन इस वैज्ञानिक सत्य को हजारों वर्षों से आध्यात्मिक और दार्शनिक भाषा में रूपायित करता आया है। अथर्ववेद कहता है—“माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः”—पृथ्वी हमारी माता है और हम उसके पुत्र। इसका सीधा तात्पर्य यह है कि पृथ्वी के उपहार किसी एक समाज, एक राष्ट्र या एक पीढ़ी के लिए नहीं—बल्कि संपूर्ण जीव-जगत के लिए समान रूप से उपलब्ध हैं। इसी भावना को उपनिषद कहते हैं—“ईशावास्यमिदं सर्वं”—यह सम्पूर्ण जगत किसी का निजी स्वामित्व नहीं, बल्कि एक साझा अस्तित्व है। आधुनिक शब्दों में कहें तो यह “Global Commons” का भारतीय संस्करण है, जहाँ संसाधन किसी के स्वामित्व में नहीं, बल्कि सभी के उपयोग में होते हैं।
यही कारण है कि प्राकृतिक संसाधनों पर एकाधिकार की अवधारणा मूलतः अमानवीय है।

यदि पृथ्वी के संसाधन संपूर्ण सृष्टि के हैं, तो मनुष्य अधिकतम यह कह सकता है कि वह उनका caretaker—संरक्षक और trustee—है। उसके पास संसाधनों का प्रयोग करने का अधिकार है, लेकिन स्वामित्व का नहीं। और trustee केवल उपयोग करता है, नष्ट नहीं करता; केवल लाभ नहीं उठाता, संरक्षण भी करता है। आज विश्व के राजनीतिक और आर्थिक ढांचे ने इस मूलभूत सत्य को पीछे कर दिया है। संसाधन जो हमारी सामूहिक धरोहर थे, वे “संपत्ति”, “राजनीतिक शक्ति”, “भू-रणनीतिक हथियार” और “उद्योग-लाभ” में बदल दिए गए।
इसी कारण जब पश्चिम एशिया के तेल कुओं पर ड्रोन हमला होता है, रूस–यूक्रेन युद्ध में गैस पाइपलाइन टूटती है, अफ्रीका में खनिज क्षेत्रों पर गृहयुद्ध होते हैं—तो नुकसान किसी एक देश का नहीं, पूरी दुनिया का होता है। तेल की कीमतें बढ़ती हैं, परिवहन महंगा होता है, बिजली दरें बढ़ती हैं, खाद्य संकट गहराता है—और अंततः पीड़ित वही गरीब जनता होती है जिसने न युद्ध किया, न संसाधन लूटा। यह वैश्विक अन्याय का सबसे विकृत रूप है।


प्राकृतिक संसाधनों की हानि केवल आर्थिक संकट नहीं लाती, बल्कि पारिस्थितिक संतुलन को भी हिला देती है। एक जंगल काटा जाता है तो सिर्फ पेड़ नहीं गिरते—वर्षा-चक्र, मिट्टी की उर्वरता, जल-संचयन, पक्षी और वन्य जीवों का जीवन, सब कुछ टूट जाता है। समुद्र में तेल रिसाव केवल समुद्री पारिस्थितिकी को नहीं मारता, बल्कि पूरे ग्रह में ताप-वृद्धि, कार्बन-असंतुलन और जलवायु–आपदाओं का कारण बनता है। जल-प्रदूषण एक नदी को नहीं मारता, बल्कि लाखों मनुष्यों, जानवरों और कृषि प्रणालियों को संकट में डाल देता है।
इसलिए यह कहना कि “प्राकृतिक संसाधनों की हानि एक राष्ट्र की हानि है”—अधूरा है। सच यह है कि प्राकृतिक संसाधन किसी एक राष्ट्र के नहीं, संपूर्ण पृथ्वी के हैं; और उनका नाश किसी एक का नहीं, संपूर्ण सृष्टि का नाश है।
भारतीय दर्शन में इस व्यापक दृष्टि का नाम है—वसुधैव कुटुम्बकम्। यह केवल कूटनीतिक नारा नहीं, बल्कि एक दार्शनिक तत्त्व है—कि पृथ्वी हमारा परिवार है, और परिवार में संसाधनों का उपयोग “समानता”, “संयम” और “कल्याण” के आधार पर होता है। ठीक इसी दृष्टि को आधुनिक पर्यावरण दर्शन “Environmental Justice” कहता है—कि संसाधनों का समान उपयोग, समान उपलब्धता और समान संरक्षण आवश्यक है।


परंतु आज विश्व इस मार्ग पर नहीं चल रहा। जो देश संसाधनों से समृद्ध हैं, वे उन्हें हथियार या राजनीतिक दबाव के रूप में उपयोग करते हैं। और जो देश इन पर निर्भर हैं, वे दुर्बल, असुरक्षित और अस्थिर बने रहते हैं। यह असमानता केवल आर्थिक नहीं, बल्कि नैतिक और सभ्यतागत असमानता है। यदि किसी को पृथ्वी ने अधिक संसाधन दिए, तो उसका पहला दायित्व होना चाहिए—“साझा धरोहर की रक्षा”—न कि “साझा धरोहर का व्यापारिक शोषण।”
यही वह क्षण है जहाँ भारतीय दृष्टि आधुनिक विश्व को एक विकल्प देती है। भारतीय परंपरा कहती है कि प्रकृति हमारी “माता” है—और माता की संपत्ति का उपयोग पुत्र समानता, सह-अस्तित्व और संयम से करते हैं। यह जीवन-दर्शन हमें “अधिक उपभोग” नहीं, “सतत उपभोग” सिखाता है। “अधिक पाने” की लालसा नहीं, “सही उपयोग” का मूल्य सिखाता है।


इसलिए आज यदि मानवता को प्राकृतिक संसाधनों पर संघर्ष रोकना है, तो उसे इस भारतीय दृष्टि को समझना होगा—कि हम पृथ्वी के शासक नहीं, बल्कि उसके देखभाल करने वाले हैं। हम न्यासी (trustees) हैं, मालिक नहीं। न्यास (trusteeship) का सिद्धांत गांधीजी ने राजनीतिक-आर्थिक संदर्भ में प्रस्तुत किया था—कि धन-संपत्ति का उपयोग “लोकहित” में होना चाहिए, न कि व्यक्तिगत लालसा में। यही सिद्धांत प्राकृतिक संसाधनों पर भी लागू होता है—कि उनका उपयोग “सृष्टि–हित” में हो, न कि “स्वार्थ–हित” में।
आज दुनिया को इस trusteeship की आवश्यकता है। यह एकमात्र दृष्टि है जो युद्धों, संसाधन-लूट, उपभोग-आधारित पूँजीवाद और पर्यावरणीय संकट के दुष्चक्र को तोड़ सकती है। यदि किसी क्षेत्र में तेल है, तो वह वहाँ के लोगों का नहीं—पूरी दुनिया का है। यदि किसी देश में विशाल वन हैं, तो वे केवल उसकी संपत्ति नहीं—पूरे ग्रह का कार्बन-संतुलन हैं। यदि किसी नदी का उद्गम किसी देश में है, तो उसका जल केवल उसी का नहीं—पूरे पारिस्थितिक तंत्र का है।


इसलिए प्राकृतिक संसाधनों पर एकाधिकार का विचार मूलतः सीमित, स्वार्थपूर्ण और अमानवीय दृष्टि है। इसके विपरीत, भारतीय दर्शन हमें सिखाता है कि सृष्टि की रक्षा में ही मानवता की रक्षा है। प्रकृति की समृद्धि में ही सभ्यता का भविष्य है। और संसाधनों की समानता में ही विश्व–कल्याण निहित है।


आज आवश्यकता इस बात की है कि वैश्विक समुदाय इस दार्शनिक और वैज्ञानिक सत्य को स्वीकार करे—कि पृथ्वी की धरोहर का संरक्षण, संतुलित उपयोग और न्यायसंगत वितरण मानवता का साझा दायित्व है। यही वह मार्ग है जो भविष्य की पीढ़ियों को सुरक्षित, संतुलित और सामंजस्यपूर्ण संसार दे सकता है। यही वह दृष्टि है जो भारत हजारों वर्षों से संजोए हुए है—और यही वह दृष्टि है जो आज के वैश्विक संकट में मानवता को दिशा दे सकती है।
संसाधन पृथ्वी के हैं, हम केवल उनके संरक्षक हैं।
और संरक्षक का धर्म—संरक्षण है, शोषण नहीं।
इसी नैतिक सत्य में विश्व–कल्याण, वैश्विक शांति और मानवता के भविष्य की सबसे मजबूत नींव निहित है।


— कैलाश चन्द्र

Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email
Previous Article#UP FIRST | बांदा में अंतरजनपदीय वाहन चोर गिरोह का भंडाफोड़, 3 गिरफ्तार |
Next Article #HARYANA FIRST | गुरुग्राम बयान पर सियासी घमासान: राव नरबीर के CM सुझाव पर विपक्ष का तीखा हमला |
Public First News

Related Posts

ECCONOMIC By Public First News0 Views

यूपी का बजट पेश होने से पहले योगी ने शेयर की फोटो, लिखा जय श्री राम

ECCONOMIC February 5, 20240 Views
ECCONOMIC By Public First News0 Views

मुइज्जू का इंडिया आउट कैंपेन फेल, मालदीव में तैनात होंगे भारतीय असैनिक समूह

ECCONOMIC February 3, 20240 Views
Business first By Public First News0 Views

Paytm बैंक खाते में जमा राशि अब नहीं रहेगी मान्य, लीजिए पूरी जानकारी

Business first February 2, 20240 Views
India first By Public First News0 Views

युवा, गरीब, महिला और किसान, विकसित भारत के चार स्तंभ, सभी को मिलेगी मजबूती

India first February 1, 20240 Views
ECCONOMIC By Public First News0 Views

अंतरिम बजट 2023: टैक्स दरों में नहीं होगा कोई बदलाव

ECCONOMIC February 1, 20240 Views
ECCONOMIC By Public First News0 Views

बजट से पहले महंगाई का झटका, LPG सिलेंडर के दाम में हुआ इजाफा

ECCONOMIC February 1, 20240 Views
Leave A Reply Cancel Reply

Top Posts

Rampur By Election 2022: भगवान राम के नाम वाले रामपुर में पहली बार कोई हिंदू विधायक बना है

December 18, 20225K Views

उत्तरकाशी टनल हादसा : उम्मीद का एक और दिन

November 23, 2023513 Views

उड़ान भरने के तुरंत बाद विमान दुर्घटनाग्रस्त

July 5, 2023408 Views

Uttarkashi Tunnel Collapse : उत्तरकाशी टनल से निकाले गए सभी 41 मजदूर

November 28, 2023271 Views
1 2 3 … 1,384 Next
Don't Miss

#CG FIRST | गंज चौक में हंगामा करने वाला आदतन आरोपी गिरफ्तार, कोतवाली पुलिस ने भेजा जेल |

By Public First News CG FIRST May 27, 20260 Views

राजनांदगांव में कानून-व्यवस्था भंग करने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ पुलिस की सख्त कार्रवाई लगातार…

CG FIRST By Public First News

#CG FIRST | दुर्ग में “फेक मैरिज इवेंट” पर बवाल, हिंदू संगठनों का विरोध तेज |

May 27, 2026 CG FIRST
CG FIRST By Public First News

#CG FIRST | धमतरी में मंदिर चोरी पर पुलिस अलर्ट, एसपी ने ली हाई लेवल बैठक |

May 27, 2026 CG FIRST
CG FIRST By Public First News

#CG FIRST | नुकीली कीलों के झूले पर बैठे कुमार जयदेव, जलनी माता जात्रा में दिखी अद्भुत आस्था |

May 27, 2026 CG FIRST
Stay In Touch
  • Facebook
  • YouTube
  • TikTok
  • WhatsApp
  • Twitter
  • Instagram
Latest Reviews
Editors Picks
Top Reviews
Advertisement
Most Popular

Rampur By Election 2022: भगवान राम के नाम वाले रामपुर में पहली बार कोई हिंदू विधायक बना है

December 18, 20225K Views

उत्तरकाशी टनल हादसा : उम्मीद का एक और दिन

November 23, 2023513 Views

उड़ान भरने के तुरंत बाद विमान दुर्घटनाग्रस्त

July 5, 2023408 Views
About Us
About Us

Public First News
Corporate Office: E/7/ HIG-139, Arera Colony, Bhopal 462016 (M.P)
Phone: 0755-7967937

Email: info@publicfirstnews.com, publicfirstnewstv@gmail.com

Public First News
Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
  • Latest News
  • Crime first
  • India first
  • Politics first
  • City first
  • Astrology first
  • Sports first
Powered by Public First News, Copyright © 2026. All rights reserved by Public First News

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

Sign In or Register

Welcome Back!

Login to your account below.

Lost password?