राजनांदगांव से एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है, जहां 10 साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 256 मजदूरों को आखिरकार न्याय मिल गया है। श्रम न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए फैक्ट्री प्रबंधन को सभी मजदूरों को 3-3 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।

पूरा मामला मीन उलरॉक फाइबर लिमिटेड फैक्ट्री से जुड़ा है, जिसे साल 2016 में अचानक बंद कर दिया गया था। आरोप है कि फैक्ट्री प्रबंधन ने बिना किसी पूर्व सूचना और बिना मजदूरों का बकाया भुगतान किए सैकड़ों श्रमिकों को काम से निकाल दिया था। इस फैसले से मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया था।

लेकिन मजदूरों ने हार नहीं मानी और एकजुट होकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। वर्षों तक चली सुनवाई, सबूतों और दलीलों के बाद अब श्रम न्यायालय ने मजदूरों के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी 256 प्रभावित मजदूरों को 3-3 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।

इस निर्णय के बाद मजदूरों में खुशी की लहर दौड़ गई है। उनका कहना है कि यह केवल आर्थिक राहत नहीं, बल्कि उनके संघर्ष, एकता और सच्चाई की जीत है। यह फैसला उन सभी लोगों के लिए भी एक मजबूत संदेश है, जो अपने अधिकारों के लिए लंबी लड़ाई लड़ रहे हैं।

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