छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के धमधा तहसील अंतर्गत आने वाले ग्राम खैरझीटी में इन दिनों ग्रामीणों का गुस्सा चरम पर है। लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे ग्रामीण अब प्रशासन के खिलाफ खुलकर सामने आ गए हैं। इस पूरे मामले की जड़ ग्राम परसकोल की वह जमीन है, जिसे करीब 40 साल पहले शासन द्वारा अधिग्रहित किया गया था, लेकिन आज तक प्रभावित किसानों को उसका मुआवजा नहीं मिल सका है।

ग्रामीणों का आरोप है कि पीढ़ियां बदल गईं, लेकिन मुआवजा अब तक नहीं मिला। कई किसानों का कहना है कि जिनके नाम पर जमीन अधिग्रहित की गई थी, वे अब इस दुनिया में भी नहीं रहे, और उनके परिवार आज भी अपने हक के लिए दर-दर भटक रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन को आवेदन और ज्ञापन सौंपे, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला।

कलेक्ट्रेट पहुंचकर किया प्रदर्शन

अपनी मांगों को लेकर ग्रामीणों ने हाल ही में कलेक्ट्रेट पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में पहुंचे ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और जल्द से जल्द मुआवजा दिलाने की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों में गहरी नाराजगी साफ देखने को मिली।

ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। उनका आरोप है कि प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा है।

शिक्षा व्यवस्था भी बदहाल

सिर्फ मुआवजे का मुद्दा ही नहीं, बल्कि गांव की शिक्षा व्यवस्था भी गंभीर संकट में है। ग्राम खैरझीटी की प्राथमिक शाला का भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। हालत इतने खराब हैं कि पिछले दो वर्षों से स्कूल को पंचायत भवन में संचालित करना पड़ रहा है।

इस अस्थायी व्यवस्था के चलते बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। पर्याप्त जगह और संसाधनों की कमी के कारण बच्चों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार स्कूल भवन के निर्माण की मांग भी उठाई गई, लेकिन इस दिशा में भी अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

ग्रामीणों की दो टूक चेतावनी

ग्रामीणों ने प्रशासन को साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मुआवजा वितरण और स्कूल भवन निर्माण को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि अब वे और इंतजार नहीं कर सकते।

प्रशासन पर टिकी निगाहें

अब इस पूरे मामले में प्रशासन क्या कदम उठाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यह मामला न केवल किसानों के हक और अधिकार से जुड़ा है, बल्कि गांव के बच्चों के भविष्य से भी सीधे तौर पर संबंधित है।

यदि समय रहते समाधान नहीं निकला, तो यह मुद्दा आने वाले दिनों में बड़ा जनआंदोलन बन सकता है।

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