उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुधवार शाम एक भीषण आग ने सैकड़ों परिवारों को बेघर कर दिया। विकासनगर क्षेत्र में लगी इस आग में 250 से ज्यादा झोपड़ियां जलकर राख हो गईं, जबकि दो मासूम बहनों की दर्दनाक मौत हो गई।

मृतक बच्चियों में एक की उम्र महज 2 साल और दूसरी की सिर्फ 2 महीने बताई जा रही है। गुरुवार सुबह जब हालात सामान्य हुए, तो घटनास्थल पर सिर्फ राख, जले हुए सामान और उजड़े हुए परिवार नजर आए। लोग अपने बचे-खुचे सामान को राख में तलाशते दिखे।

आग के दौरान करीब 30 सिलेंडर फटने की भी जानकारी सामने आई है, जिससे आग ने विकराल रूप ले लिया। लपटें इतनी तेज थीं कि करीब 10 किलोमीटर दूर तक दिखाई दे रही थीं।

घटना के बाद कई परिवारों को प्रशासन द्वारा रैन बसेरों में शिफ्ट किया गया, जबकि कुछ लोगों ने पास के खाली प्लॉट में रात गुजारी।

वहीं, पीड़ितों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ कोठी मालिकों ने उनकी झोपड़ियों में आग लगाई। उनका दावा है कि उन्हें पहले धमकाया गया था कि झोपड़ियां हटा लें, नहीं तो अंजाम भुगतना पड़ेगा।

पीड़ितों ने यह भी आरोप लगाया कि अगर फायर ब्रिगेड समय पर पहुंच जाती, तो नुकसान को कम किया जा सकता था।

स्थिति को देखते हुए इलाके में पुलिस बल बढ़ा दिया गया है। संभावित तनाव को ध्यान में रखते हुए जवानों को हेलमेट और लाठी के साथ तैनात किया गया है।

फिलहाल प्रशासन प्रभावित परिवारों की सूची तैयार कर रहा है। हालांकि, मुआवजा और राहत को लेकर अब तक कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की गई है।

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