भोपाल के करोंद से रत्नागिरी/अयोध्या बायपास तक प्रस्तावित 16 किमी लंबी 10 लेन सड़क परियोजना अब कानूनी और जन-आंदोलन दोनों के घेरे में है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने इस परियोजना पर संज्ञान लेते हुए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI), पर्यावरण मंत्रालय, मध्यप्रदेश वन विभाग, भोपाल कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त समेत कई विभागों को नोटिस जारी किया है।
मामला कैसे उठा?
भोपाल के पर्यावरण कार्यकर्ता नितिन सक्सेना ने NGT में याचिका दायर की, जिसमें आरोप लगाया गया कि यह परियोजना मध्यप्रदेश वृक्ष परिरक्षण (नगरीय क्षेत्र) अधिनियम 2001 का उल्लंघन कर रही है। याचिका के अनुसार, इस परियोजना के लिए 8,000 से 12,000 पुराने हरे-भरे पेड़ों की कटाई की योजना है, जो भोपाल के पर्यावरण संतुलन के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
परियोजना के मुख्य तथ्य
- लंबाई: 16 किमी (करोंद, भोपाल से रत्नागिरी/अयोध्या बायपास तक)
- पेड़ कटाई का अनुमान: 8,000 से 12,000
- कारण: सड़क चौड़ीकरण, ब्लैक स्पॉट हटाना, हर साल होने वाली 30-35 दुर्घटनाओं में कमी लाना
- प्रभावित क्षेत्र: आसाराम तिराहा करोंद रोड से रत्नागिरी तिराहा अयोध्या बायपास
- कानूनी नियम: धारा 6(3) के तहत, पेड़ काटने के 30 दिन के भीतर नया पौधा लगाना या प्रति पेड़ ₹500 का मुआवजा देना जरूरी है।
NGT का आदेश
ट्रिब्यूनल ने सभी संबंधित विभागों को 4 सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 14 अक्टूबर 2025 को होगी।
जन आंदोलन और विरोध
स्थानीय नागरिक, बच्चे, और कई पर्यावरण संगठन सड़क पर उतर आए हैं।
- प्रदर्शन के तरीके: पेड़ों को गले लगाना, रक्षासूत्र बांधना, धरना
- मांग: वैकल्पिक रूट खोजा जाए, पेड़ों को बचाया जाए
- सुझाव: कटे पेड़ों के बदले ‘सिटी फॉरेस्ट’ या बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जाए
समर्थन में तर्क
NHAI का कहना है कि इस सड़क चौड़ीकरण से यातायात में सुधार होगा, ब्लैक स्पॉट खत्म होंगे और जानलेवा दुर्घटनाएं घटेंगी। साथ ही, पेड़ कटाई के बदले बड़े पैमाने पर पौधारोपण की योजना है।
पर्यावरणीय चिंता
विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि इतने बड़े पैमाने पर पुराने पेड़ों की कटाई से —
- शहरी तापमान में वृद्धि
- ऑक्सीजन आपूर्ति में कमी
- प्रदूषण में इजाफा
- बारिश के पैटर्न में बदलाव हो सकता है।
निष्कर्ष
यह मामला सिर्फ एक सड़क निर्माण का नहीं, बल्कि शहरी विकास बनाम पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन की लड़ाई है। NGT के हस्तक्षेप के बाद अब उम्मीद है कि आने वाला फैसला जनहित और पर्यावरणीय संतुलन दोनों को ध्यान में रखकर किया जाएगा।
