मध्य प्रदेश कांग्रेस में इन दिनों टैलेंट हंट कम और टैलेंट गायब ज़्यादा चर्चा में है। इसी क्रम में कांग्रेस के मीडिया विभाग अध्यक्ष मुकेश नायक ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है — और पार्टी की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर सार्वजनिक तमाशा बन गई है।

सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस के बहुचर्चित टैलेंट हंट कार्यक्रम के लिए बनी 11 सदस्यीय समिति में जब मीडिया अध्यक्ष मुकेश नायक का नाम नदारद मिला, तो सियासत गरमा गई।
मतलब साफ़ है — कांग्रेस में अब टैलेंट से ज़्यादा टेबल के नीचे की सूची अहम हो गई है।

‘नायक’ बाहर, स्क्रिप्ट भीतर?

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह सिर्फ़ नाम कटने का मामला नहीं, बल्कि पटवारी–नायक समीकरण के पटरी से उतरने की कहानी है।
नई मीडिया टीम में नए नाम जोड़े गए, लेकिन पुराने ‘नायक’ को कहानी से बाहर कर दिया गया।

बीजेपी ने ली चुटकी

मौका मिला तो बीजेपी ने भी तंज कसने में देर नहीं की —

“कांग्रेस में टैलेंट हंट नहीं, टैलेंट शंट चल रहा है।”

खेमों में बंटी कांग्रेस

मुकेश नायक का इस्तीफ़ा उस कांग्रेस के लिए एक और झटका है, जो पहले ही गुटबाज़ी, नेतृत्व संकट और ज़मीनी संघर्ष से जूझ रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो यह घटनाक्रम पटवारी नेतृत्व को बैकफ़ुट पर धकेलने वाला साबित हो सकता है।

सवाल वही पुराना
• कांग्रेस में फैसले कमेटी ले रही है या केमिस्ट्री?
• मीडिया विभाग का मुखिया अगर टैलेंट लिस्ट में फिट नहीं, तो फिट कौन?
• और क्या आने वाले दिनों में कांग्रेस में और ‘नायक’ पर्दे से गायब होंगे?

फिलहाल इतना तय है —
मध्य प्रदेश कांग्रेस की फिल्म में स्क्रिप्ट उलझी है, कलाकार नाराज़ हैं और डायरेक्शन पर सवाल उठ रहे हैं।

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