शाहनगर स्थित तेंदुघाट बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना से विस्थापित हुए ग्रामीण आज भी अपनी जमीन और आवास के मुआवजे के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
जल संसाधन विभाग ने विशाल बांध परियोजना के लिए कई ग्रामों और किसानों की जमीन अधिग्रहित की थी। कई किसानों का 2015 में मुआवजा अवॉर्ड पारित हो गया था, लेकिन आज 11 वर्षों बाद भी उन्हें राशि नहीं मिली। वहीं 2017-18 में अधिग्रहित भूमि का अवॉर्ड भी आज तक पारित नहीं हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार स्थानीय प्रशासन और अधिकारियों से मांग के बावजूद प्रतिपूर्ति नहीं मिली, जिससे उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति बदहाल हो गई है। कई परिवार दर-दर भटक रहे हैं और किसानों ने एक बार फिर एसडीएम को ज्ञापन सौंप कर मुआवजे की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन किया जाएगा।
एसडीएम ने कहा कि प्रतिपूर्ति विसंगतियों की जानकारी नहीं थी और शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया। वहीं अधिकारियों ने एसआईआर की व्यस्तता को भी देरी का कारण बताया।
विशेष जानकारी:
- तेंदुघाट बांध परियोजना के तहत सैकड़ों गांव प्रभावित।
- कई किसान और ग्रामीण 2015 से मुआवजा पाने के लिए भटक रहे।
- 2017-18 अधिग्रहण के अवॉर्ड पर भी लंबित स्थिति।
- स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की पहल असफल साबित।
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