पन्ना। श्रमिक और आदिवासी वर्गों के हितों की रक्षा के लिए सरकार और नेताओं द्वारा की जाने वाली घोषणाएं और योजनाएं तो बहुत हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनकी पीड़ा सुनने वाला कोई नहीं। पन्ना जिले के शाहनगर क्षेत्र के ग्राम महगवां सरकार में एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां एक आदिवासी परिवार की कृषि भूमि को 12 वर्ष पहले सिंचाई नहर के लिए अधिग्रहित कर लिया गया, लेकिन आज तक मुआवजा नहीं मिला।

इस दौरान मुआवजे की आस में परिवार के बड़े भाई सक्कू आदिवासी की पिछले वर्ष मौत हो गई, जबकि 70 वर्षीय बख्तू आदिवासी गंभीर बीमारी से जूज रहे हैं। प्रशासनिक उदासीनता से आहत परिवार की आंखें नम हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं।

2020 में हुआ था अवार्ड, लेकिन राशि नहीं मिली

पीड़ित परिवार के अनुसार, अधिग्रहीत भूमि के एवज में 2020 में कलेक्ट्रेट से बख्तू आदिवासी और उनके भाई सक्कू आदिवासी के नाम 27-27 हजार रुपये मुआवजे का अवार्ड पारित किया गया था। लेकिन यह राशि आज तक उनके खाते में नहीं पहुंची। परिवार ने शाहनगर और पन्ना के कार्यालयों के无数 चक्कर लगाए, लेकिन कोई राहत नहीं मिली।

हाल ही में स्थानीय सरपंच ने भी आदिवासी परिवार के समर्थन में एसडीएम कार्यालय को आवेदन सौंपा है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

पन्ना जिले में मुआवजा विसंगतियां आम

पन्ना जिले में भूमि अधिग्रहण से जुड़े मुआवजा मामलों में अनियमितताएं और देरी की शिकायतें पहले भी कई बार सामने आ चुकी हैं। विभिन्न स्थानों पर इसके विरोध में प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपे गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आदिवासी क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण के मामलों में पारदर्शिता और समयबद्ध मुआवजा वितरण सुनिश्चित करना जरूरी है।

यह मामला एक बार फिर प्रशासनिक संवेदनशीलता पर सवाल उठाता है। पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद में अब भी इंतजार कर रहा है।

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