मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बालाघाट जिले में आयोजित मध्यप्रदेश पुलिस क्रम-से-पूर्व पदोन्नति अलंकरण समारोह को संबोधित करते हुए बड़ा बयान दिया कि मध्यप्रदेश की धरती पर अब कोई नक्सलवादी शेष नहीं है। उन्होंने इसे प्रदेश के लिए संतोष और गर्व का क्षण बताते हुए कहा कि जिस बालाघाट का नाम कभी नक्सल हिंसा और भय से जुड़ा होता था, आज वही बालाघाट विजय और शौर्य का प्रतीक बन चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद एक 35 वर्षों पुरानी कैंसर जैसी समस्या थी, जिसे खत्म करना कभी असंभव प्रतीत होता था, लेकिन सुरक्षा बलों की निरंतर मेहनत, साहस और रणनीतिक कार्रवाई ने इसे समाप्त कर दिखाया।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा लिए गए “लाल सलाम को आख़िरी सलाम” के संकल्प को मध्यप्रदेश में पूरी तरह सिद्ध कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1990 से 2025 के बीच प्रदेश में 38 पुलिस जवानों और 27 निर्दोष नागरिकों ने नक्सल हिंसा में अपने प्राणों की आहुति दी, जिनका बलिदान व्यर्थ नहीं गया। उन्होंने कहा कि इन शहीदों के सम्मान में प्रदेश सरकार ने नक्सलवाद की जड़ों को चुन-चुन कर समाप्त किया है और यह उपलब्धि राष्ट्र की आत्मा की रक्षा के समान है।

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि वर्ष 2025 में भी कठिन परिस्थितियों—लगातार बारिश, घने जंगल, दुर्गम पहाड़ और जंगली जानवरों के खतरों—के बावजूद सुरक्षा बलों ने नक्सल विरोधी अभियानों को नहीं रोका। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में अब तक 4,104 नक्सल विरोधी अभियान चलाए गए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 23 प्रतिशत अधिक हैं। मेगा CASO रणनीति के तहत नक्सलियों को तीन दिशाओं से घेरकर न्यूट्रलाइज किया गया, जिससे उनकी गतिविधियां पूरी तरह बिखर गईं और वे जंगलों में कहीं भी टिक नहीं पा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा के साथ-साथ विकास और सामाजिक पुनर्निर्माण पर भी समान रूप से ध्यान दिया गया है। बालाघाट पुलिस द्वारा 100 से अधिक स्कूलों का नवीनीकरण किया गया, जबकि 150 नक्सल प्रभावित स्कूलों को पुनः शिक्षा व्यवस्था से जोड़ा गया। उन्होंने घोषणा की कि कृषि कल्याण वर्ष के अंतर्गत महा-कौशल बेल्ट की कृषि कैबिनेट बैठक बालाघाट में आयोजित की जाएगी, जिससे क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी।

समारोह के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि अमर जवान ज्योति अब केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बालाघाट भी वीरता और बलिदान का राष्ट्रीय प्रतीक बनेगा। उन्होंने इस अवसर पर नक्सलवाद के खिलाफ मिली इस ऐतिहासिक विजय को समर्पित एक स्मारक का लोकार्पण करते हुए कहा कि यह स्मारक प्रदेश के वीर जवानों के साहस, बलिदान और संकल्प का स्थायी प्रतीक होगा।

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