बुंदेलखंड विशेष पैकेज (2010-11) के तहत केंद्र सरकार द्वारा क्षेत्र के विकास के लिए बड़े पैमाने पर बांध, तालाब और कृषि संरचनाओं की आधारशिला रखी गई थी। इन परियोजनाओं का उद्देश्य सिंचाई व्यवस्था को मजबूत कर किसानों को राहत देना था। लेकिन पन्ना जिले के शाहनगर क्षेत्र में हालात इसके उलट नजर आ रहे हैं।
करोड़ों खर्च, लेकिन किसानों को नहीं मिला लाभ
सूत्रों के अनुसार जल संसाधन विभाग द्वारा नहर निर्माण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन कथित तौर पर गुणवत्ताहीन निर्माण के कारण नहरें जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। कई स्थानों पर नहरों से रिसाव हो रहा है, जिससे आसपास की कृषि भूमि जलभराव का शिकार हो गई है। परिणामस्वरूप सैकड़ों एकड़ रकबे पर पिछले कई वर्षों से खेती प्रभावित है।
कुछ क्षेत्रों में नहरें जर्जर अवस्था में हैं और सिंचाई का लाभ किसानों तक पहुंच ही नहीं पा रहा है। वहीं, टूट-फूट की मरम्मत के नाम पर किसानों की निजी जमीन पर अतिक्रमण किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं।
किसानों की शिकायतों पर कार्रवाई नहीं
क्षेत्र की विभिन्न ग्राम पंचायतों और किसानों ने समय-समय पर प्रशासन को आवेदन सौंपे, लेकिन आरोप है कि अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उल्टा, राजस्व विभाग के कर्मचारियों द्वारा प्रभावित कृषि भूमि को ‘परती’ दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई, जिससे निर्माण में हुई कथित अनियमितताओं पर पर्दा डालने की कोशिश बताई जा रही है।
जिम्मेदारों की चुप्पी
पूरे मामले को लेकर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका। जानकारों का कहना है कि विभाग की कार्यशैली के कारण शासन के करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं मिले, बल्कि किसान ही नुकसान में रहे।
जांच की मांग तेज
स्थानीय लोगों और किसानों का कहना है कि इस मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच होनी चाहिए, ताकि दोषियों की जवाबदेही तय हो सके और प्रभावित किसानों को राहत मिल सके।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या शासन-प्रशासन इस मामले में पारदर्शी जांच कर किसानों को न्याय दिलाएगा, या फिर यह मुद्दा भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?
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