छत्तीसगढ़ से संगठन और सामाजिक चेतना की दिशा में एक बड़ी खबर सामने आई है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने अपने शताब्दी वर्ष के अवसर पर प्रदेश में अब तक का सबसे बड़ा “गृह संपर्क अभियान” सफलतापूर्वक पूरा किया है।
इस अभियान के तहत संघ के स्वयंसेवक 30 लाख से अधिक परिवारों तक पहुंचे और करीब 10 लाख लोगों से सीधे संवाद स्थापित किया। इसके साथ ही 2 हजार से अधिक सम्मेलनों का आयोजन किया गया, जिनमें भारी संख्या में लोगों ने भाग लिया और खास बात यह रही कि महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से भी अधिक रही।
यह अभियान केवल संगठन के विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की रणनीति का भी संकेत देता है। मार्च 2027 से संघ अपने ढांचे में बड़ा बदलाव करने जा रहा है, जिसके तहत वर्तमान प्रांत व्यवस्था की जगह नई संभाग रचना लागू की जाएगी, ताकि निर्णय प्रक्रिया को और तेज एवं प्रभावी बनाया जा सके।
छत्तीसगढ़ में शाखाओं का तेजी से विस्तार, युवाओं की बढ़ती भागीदारी और ‘पंच परिवर्तन’ के लक्ष्य यह दर्शाते हैं कि संघ अब जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह अभियान न केवल संगठन की शक्ति को प्रदर्शित करता है, बल्कि समाज में राष्ट्रबोध और सामुदायिक चेतना को बढ़ावा देने का भी एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
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