उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर के पहुंच मार्ग पर स्थित बेगमबाग क्षेत्र में एक बार फिर प्रशासनिक कार्रवाई देखने को मिली। शनिवार सुबह से अवैध निर्माणों पर बुलडोजर और पोकलेन मशीनों के जरिए कार्रवाई शुरू की गई। इस दौरान 5 अवैध बिल्डिंगों को जमींदोज किया जा रहा है।
यह कार्रवाई ऐसे समय में की गई है जब लोअर कोर्ट, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से संबंधित मामलों में स्टे समाप्त हो चुका है। प्रशासन के अनुसार, लंबे समय से न्यायालय में लंबित मामलों के निपटारे के बाद अब अवैध निर्माण हटाने की प्रक्रिया तेज की गई है।
महाकाल मंदिर पहुंच मार्ग पर कार्रवाई
बेगमबाग क्षेत्र उज्जैन में महाकाल मंदिर पहुंच मार्ग पर स्थित है और इसे संवेदनशील इलाका माना जाता है। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई। वाहनों की आवाजाही को रोका गया और केवल श्रद्धालुओं को पैदल मार्ग से मंदिर तक जाने की अनुमति दी गई।
सुबह करीब 9 बजे शुरू हुई कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से जारी रही। प्रशासन के मुताबिक, इस बार किसी प्रकार का विरोध प्रदर्शन देखने को नहीं मिला।
आवासीय भूखंडों पर हुआ व्यावसायिक उपयोग
जानकारी के अनुसार, वर्ष 1985 में उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा बेगमबाग क्षेत्र में आवासीय उपयोग के लिए 30 साल की लीज पर भूखंड आवंटित किए गए थे। आरोप है कि कई भूखंड धारकों ने नियमों के विरुद्ध इनका व्यावसायिक उपयोग किया और बड़े पैमाने पर निर्माण कर लिया।
बताया जा रहा है कि 45 आवासीय भूखंडों को विभाजित कर करीब 90 व्यावसायिक निर्माण तैयार किए गए। वर्ष 2014-15 के आसपास इन भूखंडों की लीज समाप्त हो गई, लेकिन नवीनीकरण नहीं कराया गया। इसके बाद विकास प्राधिकरण ने नोटिस जारी किए और मामला न्यायालय पहुंचा।
पहले भी हो चुकी है बड़ी कार्रवाई
इससे पहले पिछले एक वर्ष में छह चरणों में करीब 58 बिल्डिंगों को हटाया जा चुका है। वर्तमान कार्रवाई के बाद कुल 63 निर्माणों को ध्वस्त किया जा चुका है। शेष 27 निर्माणों पर भी कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
आगामी सिंहस्थ 2028 को देखते हुए तैयारी
प्रशासन का कहना है कि जिस क्षेत्र में कार्रवाई की जा रही है, वहां भविष्य में ब्रिज निर्माण प्रस्तावित है। आगामी सिंहस्थ 2028 को देखते हुए यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की योजना बनाई गई है।
उज्जैन विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, जिन भवनों पर कार्रवाई की जा रही है, उन्हें पूर्व में नोटिस दिया गया था और संबंधित पक्षों को न्यायालय प्रक्रिया की जानकारी भी दी गई थी। इसके बाद कई लोगों ने स्वेच्छा से भवन खाली करना शुरू कर दिया।
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