महाकाल मंदिर प्रशासन की औचक जांच में सामने आई शिकायतें, पुलिस ने दर्ज की एफआईआर
उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती व्यवस्था में अनियमितताओं का एक बड़ा मामला सामने आया है। मंदिर प्रशासन द्वारा किए गए औचक निरीक्षण के दौरान श्रद्धालुओं से भस्म आरती में प्रवेश अनुमति दिलाने के नाम पर अतिरिक्त राशि वसूले जाने की शिकायतें मिली हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है और जांच शुरू कर दी गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार मंदिर के प्रशासक एवं अपर कलेक्टर प्रथम कौशिक ने मध्यरात्रि में भस्म आरती व्यवस्था का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने नीलकंठ द्वार और गेट क्रमांक-1 पर पहुंचकर श्रद्धालुओं के अनुमति पत्रों की जांच की तथा उनसे सीधे संवाद कर व्यवस्थाओं की जानकारी ली।

इसी दौरान तीन अलग-अलग प्रकरण सामने आए, जिनमें श्रद्धालुओं ने शिकायत की कि भस्म आरती में प्रवेश की अनुमति दिलाने के नाम पर उनसे ₹2500 प्रति व्यक्ति की अतिरिक्त राशि वसूली गई। श्रद्धालुओं ने बताया कि उन्हें अधिकृत प्रक्रिया से हटकर अनुमति दिलाने का आश्वासन देकर यह राशि ली गई थी।

शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मंदिर प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई की। देर रात करीब 1:30 बजे संबंधित मामले में महाकाल थाना में शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई प्रारंभ कर दी है। मामले में शामिल व्यक्तियों की भूमिका की जांच की जा रही है।

निरीक्षण के बाद मंदिर प्रशासन ने भस्म आरती व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी एवं व्यवस्थित बनाने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत भस्म आरती में प्रवेश के लिए नीलकंठ प्रवेश द्वार को एकमात्र अधिकृत प्रवेश द्वार बनाने का निर्णय लिया गया है। साथ ही अधिकारियों को शिकायतों के त्वरित निराकरण और व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे भस्म आरती की अनुमति केवल अधिकृत माध्यमों से ही प्राप्त करें। किसी भी व्यक्ति या बिचौलिये के झांसे में न आएं तथा निर्धारित शुल्क से अधिक राशि का भुगतान न करें। यदि कोई व्यक्ति अतिरिक्त राशि की मांग करता है, तो इसकी सूचना तत्काल मंदिर प्रशासन या पुलिस को दें।

इस मामले के सामने आने के बाद भस्म आरती व्यवस्था को लेकर प्रशासन की सख्ती बढ़ गई है। अधिकारियों का कहना है कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
PUBLICFIRSTNEWS.COM









