जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले के मायन (बिजहामा) क्षेत्र में बादल फटने और अचानक आई बाढ़ के बाद फंसे ग्रामीणों को भारतीय सेना ने सुरक्षित बाहर निकालकर एक बार फिर मानवता और साहस की मिसाल पेश की।

बादल फटने के कारण टेकपाथरी रिज इलाके में पानी का स्तर अचानक बढ़ गया, जिससे कई ग्रामीणों का संपर्क बाहरी दुनिया से कट गया। प्रभावित लोगों में महिलाएं और बुज़ुर्ग भी शामिल थे। सूचना मिलते ही भारतीय सेना के जवान कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और तेज़ बहाव के बीच मौके पर पहुंचे और तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया।

रस्सियों के सहारे सुरक्षित निकाले ग्रामीण

रेस्क्यू अभियान के दौरान सेना के जवानों ने रस्सियों और अस्थायी क्रॉसिंग की मदद से ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया। बचाए गए लोगों में एक ऐसा ग्रामीण भी शामिल था, जो कृत्रिम पैर के सहारे चलता था और उसका एक हाथ भी नहीं था। चुनौतीपूर्ण हालात के बावजूद सेना ने सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

रेस्क्यू के बाद भोजन और प्राथमिक सहायता

सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के बाद सेना के जवानों ने प्रभावित ग्रामीणों को भोजन, नाश्ता और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई। स्थानीय लोगों ने भारतीय सेना के इस मानवीय प्रयास की सराहना करते हुए जवानों का आभार व्यक्त किया।

आपदा में फिर दिखी सेना की संवेदनशील भूमिका

यह अभियान केवल राहत और बचाव का उदाहरण नहीं, बल्कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान आम नागरिकों की सुरक्षा के प्रति भारतीय सेना की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। सीमाओं की रक्षा के साथ-साथ आपदा के समय राहत कार्यों में सेना की सक्रिय भूमिका एक बार फिर सामने आई है।

भारतीय सेना का यह साहसिक अभियान मुश्किल परिस्थितियों में फंसे लोगों के लिए जीवनरक्षक साबित हुआ और स्थानीय लोगों के बीच विश्वास और सुरक्षा की भावना को और मजबूत किया।

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