पब्लिक फर्स्ट। नई दिल्ली । ब्यूरो ।
सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को सीमा विवाद को लेकर दिए गए बयानों पर कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने पूछा कि “आपको कैसे पता चला कि चीन ने भारत की 2000 वर्ग किलोमीटर जमीन पर कब्जा कर लिया है?” साथ ही, कोर्ट ने यह भी कहा कि “यदि आप सच्चे भारतीय होते, तो सोशल मीडिया पर बयान देने के बजाय संसद में सवाल उठाते।”
यह मामला राहुल गांधी द्वारा भारतीय सेना और चीन के साथ सीमा विवाद को लेकर की गई एक टिप्पणी पर आधारित है, जिसके चलते उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज हुआ था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने राहुल को अस्थायी राहत देते हुए मानहानि मामले पर रोक लगा दी है, लेकिन उन्हें कड़ी चेतावनी भी दी है।
कोर्ट की नसीहत: जिम्मेदारियां निभाएं, सोशल मीडिया नहीं संसद माध्यम हो
अदालत ने टिप्पणी की कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमाओं से जुड़े मसलों पर बिना ठोस सबूत बयान देना गंभीर है। “नेताओं को जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ बयान देना चाहिए,” कोर्ट ने यह कहते हुए दोहराया कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर भड़काऊ या गैर-आधिकारिक बयान देशहित के खिलाफ हैं।
राजनीतिक बयानबाजी पर न्यायिक चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में संकेत दिया कि राजनीतिक नेताओं को लोकतंत्र की गरिमा बनाए रखते हुए, संसदीय मंच का उपयोग करना चाहिए, न कि सोशल मीडिया और सार्वजनिक रैलियों के माध्यम से भ्रामक तथ्य फैलाना।
राहुल गांधी के लिए यह टिप्पणी केवल कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक चेतावनी भी मानी जा रही है।
