बालाघाट जिले के खैरलांजी तहसील निवासी प्रसन्नजीत रंगारी, जो पिछले 7 वर्षों से पाकिस्तान की जेल में बंद थे, अब रिहा हो गए हैं। उनके रिहाई की खबर मिलने के बाद परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई है।
बहन संघमित्रा की कोशिशों का असर
प्रसन्नजीत के परिवार के अनुसार, उनकी बहन संघमित्रा ने लंबे समय तक भाई की रिहाई के लिए प्रयास किए। साल 2021 में जानकारी मिलने के बाद उन्होंने विभिन्न सरकारी दफ्तरों और नेताओं के दरवाजे खटखटाए। अब उनकी मेहनत सफल हुई और प्रसन्नजीत जेल से आजाद हुए।
प्रसन्नजीत साल 2017-18 में घर से लापता हो गए थे। कुछ समय बाद वह बिहार लौट आए थे, लेकिन फिर अचानक घर से गायब हो गए। परिवार ने लंबे समय तक उन्हें खोजा लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। दिसंबर 2021 में उन्हें फोन आया कि प्रसन्नजीत पाकिस्तान की जेल में बंद हैं।
उन्होंने 1 अक्टूबर 2019 को पाकिस्तान के बाटापुर से हिरासत में लिए गए थे और जेल में सुनिल अदे के नाम से बंद थे। अब वह आजाद हो चुके हैं और जल्द ही अपने मां और बहन से मिलेंगे।
रिहाई की खबर खैरलांजी पुलिस थाने से 01 फरवरी को मिली। परिवार आर्थिक रूप से कमजोर होने और दूर यात्रा में असमर्थ होने के कारण अब मदद की उम्मीद कर रहा है कि किसी के सहयोग से प्रसन्नजीत को अमृतसर लाने में मदद मिले।
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