जिले के पाली विकासखंड का छिंदपहरी गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। घने जंगलों और कच्चे रास्तों के बीच बसे इस गांव में करीब 30 धनुहार परिवार निवास करते हैं, लेकिन यहां आज तक पक्की सड़क, स्थायी बिजली और स्वच्छ पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पाई हैं।

गांव की स्थिति इतनी खराब है कि बीमार पड़ने पर मरीजों को खाट या कंधे के सहारे कई किलोमीटर दूर अस्पताल तक ले जाना पड़ता है। यह स्थिति ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।

हालांकि गांव में सोलर पैनल लगाए गए हैं, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यह पर्याप्त नहीं है और वे लंबे समय से स्थायी बिजली व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।

इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है, जहां संसाधनों के अभाव में उनका भविष्य अंधकार में नजर आता है।

सरकारी रिकॉर्ड में भले ही विकास के दावे किए जाते हों, लेकिन छिंदपहरी गांव की जमीनी हकीकत उन दावों से बिल्कुल अलग नजर आती है

अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब तक यह गांव मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करता रहेगा और कब यहां विकास की असली रोशनी पहुंचेगी।

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