छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव शहर में स्थित शीतला माता मंदिर आस्था, इतिहास और चमत्कार का अद्भुत संगम है। यह प्राचीन मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि अपनी अनोखी मान्यताओं के कारण भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष स्थान रखता है।

350 साल पुराना सिद्ध पीठ

माना जाता है कि यह मंदिर करीब 350 साल पुराना है और इसकी स्थापना रियासत काल में हुई थी। यह मंदिर एक सिद्ध पीठ के रूप में प्रसिद्ध है, जहां श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए दूर-दूर से आते हैं।

मंदिर परिसर में लगभग 35 से 40 देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं, जो इसकी आध्यात्मिक महत्ता को और बढ़ाती हैं।

मिट्टी और पानी से रोगमुक्ति की अनोखी मान्यता

इस मंदिर की सबसे खास और चौंकाने वाली मान्यता इसके पास स्थित तालाब से जुड़ी है।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस तालाब की मिट्टी और पानी में अद्भुत उपचार शक्ति है।

कहा जाता है कि ‘माता’ यानी चेचक जैसी बीमारी से पीड़ित लोग यहां आकर तालाब की मिट्टी और पानी का उपयोग करते हैं, जिससे उन्हें राहत मिलती है। यही कारण है कि यह स्थान आस्था के साथ-साथ उपचार का केंद्र भी बन गया है।

एक ही परिसर में मंदिर और राजाओं का मठ

इस मंदिर की एक और अनोखी विशेषता यह है कि यहां माता रानी का मंदिर और राजाओं का मठ एक ही परिसर में स्थित हैं। प्रदेश में इस तरह का संगम बहुत ही दुर्लभ माना जाता है, जो इस स्थान को और भी विशेष बनाता है।

श्रद्धालुओं की अटूट आस्था

हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। वे माता रानी के दर्शन कर अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं और आस्था के साथ इस पवित्र स्थल से जुड़ते हैं।
विशेष अवसरों और त्योहारों पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिलती है।

आस्था और विरासत का संगम

राजनांदगांव का यह शीतला माता मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।
यहां का वातावरण, मान्यताएं और इतिहास—सब मिलकर इसे एक अद्वितीय पहचान देते हैं।

PUBLICFIRSTNEWS.COM

Share.
Leave A Reply