छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में सक्रिय माओवादी नेटवर्क को एक बड़ा झटका लगा है। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में शुक्रवार दोपहर करीब 3 बजे पीएलजीए बटालियन के टॉप कमांडर सोढ़ी केसा समेत कुल 42 माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर दिया।

ये सभी माओवादी लंबे समय से बस्तर और आसपास के इलाकों में सक्रिय थे। सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव और बदलते हालात के चलते इन्होंने मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया है। इसे बस्तर क्षेत्र में शांति बहाली की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

आत्मसमर्पण करने वालों में संगठन के कई बड़े पदों पर रहे सदस्य शामिल हैं, जिनमें प्लाटून कमांडर, एरिया कमेटी सदस्य और वरिष्ठ लीडर तक शामिल हैं।

सोढ़ी केसा, जिसे सोडी केशालू के नाम से भी जाना जाता है, पीएलजीए बटालियन नंबर-1 का प्रमुख चेहरा था। वह करीब 30 साल से माओवादी गतिविधियों में सक्रिय रहा और सुकमा जिले से निकलकर संगठन में ऊंचे पद तक पहुंचा। उस पर बस्तर के युवाओं को गुमराह कर संगठन में शामिल कराने के आरोप भी रहे हैं।

आत्मसमर्पण के दौरान माओवादियों ने भारी मात्रा में हथियार भी जमा कराए हैं। कुल 36 हथियारों में AK-47, इंसास राइफल, SLR, ग्रेनेड लॉन्चर और पिस्टल शामिल हैं। इसके अलावा करीब 800 ग्राम सोना भी सौंपा गया, जो संगठन की इमरजेंसी फंडिंग का हिस्सा बताया जा रहा है।

खास बात यह रही कि एक प्रशिक्षित माओवादी डॉक्टर ने भी आत्मसमर्पण किया, जिससे यह साफ होता है कि संगठन का मेडिकल और लॉजिस्टिक नेटवर्क भी कमजोर हो चुका है।

इस पूरे घटनाक्रम पर बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी. ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बस्तर अब लगभग सशस्त्र माओवाद से मुक्त हो चुका है। हालांकि, दूरस्थ वनांचल और सीमावर्ती क्षेत्रों में अभी भी कुछ कैडर सक्रिय हैं।

उन्होंने शेष बचे माओवादियों से अपील करते हुए कहा कि वे जल्द से जल्द आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में शामिल हों। साथ ही चेतावनी दी कि यदि समय रहते पुनर्वास नहीं किया गया, तो सुरक्षाबल अपने अभियान को जारी रखेंगे।

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