भारत की पहचान उसकी समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और कृषि आधारित जीवनशैली से होती है। खेती यहां केवल जीविकोपार्जन का माध्यम नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ आस्था और संबंध का प्रतीक भी है।

ऐसी ही एक अनोखी परंपरा एमसीबी जिले के नागपुर गांव में देखने को मिलती है, जहां किसान आज भी “कठोरी” पूजा की परंपरा को पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ निभाते हैं।

दरअसल, हर साल नए कृषि सत्र की शुरुआत से पहले किसान अपने खेतों में जाकर विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। यह पूजा वर्षा के देवता इंद्रदेव को समर्पित होती है। मान्यता है कि इंद्रदेव की कृपा के बिना खेती संभव नहीं, क्योंकि बारिश ही फसलों का आधार होती है।

इस दौरान किसान भूमि माता की पूजा करते हैं, अन्न देवताओं को स्मरण करते हैं और अच्छी फसल की कामना करते हैं। पूजा के बाद ही बुवाई और खेती के अन्य कार्य शुरू किए जाते हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, “कठोरी” पूजा केवल परंपरा नहीं बल्कि गहरा विश्वास है। उनका मानना है कि इस पूजा के बिना खेती शुरू करना शुभ नहीं माना जाता। पूजा के बाद उन्हें यह भरोसा होता है कि समय पर अच्छी वर्षा होगी।

गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। पहले जब सिंचाई के आधुनिक साधन नहीं थे, तब खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर थी, इसलिए इंद्रदेव की पूजा का विशेष महत्व था।

खास बात यह है कि आज भी गांव का युवा वर्ग इस परंपरा को पूरी श्रद्धा से निभा रहा है। वे इसे अपनी सांस्कृतिक पहचान और विरासत मानते हैं।

“कठोरी” पूजा सामाजिक एकता का भी प्रतीक है। इस अवसर पर पूरा गांव एकजुट होकर पूजा करता है, जिससे भाईचारा और सामूहिक भावना मजबूत होती है।

आधुनिकता के इस दौर में जहां कई परंपराएं खत्म हो रही हैं, वहीं नागपुर गांव के लोग इस परंपरा को जीवित रखकर एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश कर रहे हैं।

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