धमतरी। शिक्षा और युवा सशक्तिकरण की दिशा में धमतरी पुलिस ने एक अभिनव पहल करते हुए “पुलिस पाठशाला” की शुरुआत की है। पुलिस अधीक्षक सूरज सिंह परिहार के मार्गदर्शन में सामुदायिक पुलिसिंग के तहत शुरू की गई यह पहल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए वरदान साबित हो सकती है।

पुलिस कंट्रोल रूम परिसर में स्थापित इस विशेष पुस्तकालय का शुभारंभ छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अरुण देव गौतम ने किया। इस अवसर पर जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, सामाजिक संगठनों और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विशेष सुविधा
“पुलिस पाठशाला” में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), राज्य लोक सेवा आयोग (PSC), व्यापम तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आवश्यक पुस्तकों, अध्ययन सामग्री और संदर्भ ग्रंथों की व्यवस्था की गई है। यहां विद्यार्थियों को शांत और सकारात्मक अध्ययन वातावरण भी उपलब्ध कराया जाएगा।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को निशुल्क अध्ययन सुविधा प्रदान की जाएगी, जिससे संसाधनों के अभाव में पीछे रह जाने वाले प्रतिभाशाली युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।
समाज और प्रशासन का मिला सहयोग

इस पहल को सफल बनाने में जिला प्रशासन, सामाजिक संगठनों, समाजसेवियों और जागरूक नागरिकों ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। कलेक्टर अविनाश मिश्रा, डीएफओ कृष्ण कुमार जाधव सहित कई अधिकारियों और नागरिकों ने प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित पुस्तकें दान कर इस अभियान को मजबूत बनाया है।
हर जिले में शुरू होनी चाहिए ऐसी पहल: डीजीपी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीजीपी अरुण देव गौतम ने धमतरी पुलिस की इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि “पुलिस पाठशाला” जैसे प्रयास प्रदेश के सभी जिलों में शुरू किए जाने चाहिए।

उन्होंने कहा कि पुलिस की भूमिका केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के विकास और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में भी उसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
युवाओं के लिए उम्मीद की नई किरण
धमतरी पुलिस की यह पहल उन हजारों युवाओं के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है, जो बड़े सपने देखते हैं लेकिन सीमित संसाधनों के कारण अपनी तैयारी को आगे नहीं बढ़ा पाते। “पुलिस पाठशाला” उन्हें शिक्षा, मार्गदर्शन और सकारात्मक माहौल उपलब्ध कराकर सफलता की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मदद करेगी।

यह पहल सामुदायिक पुलिसिंग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो पुलिस और समाज के बीच विश्वास को मजबूत करने के साथ-साथ युवाओं के भविष्य को संवारने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।









