- मप्र में पीआर एजेंसियों के वारे न्यारे।
इन दिनो जेन जी के बीच अपनी बिगड़ती इमेज का डर हर एक राजनेता को सता रहा है। ऐसे में पीआर एजेंसियों के मप्र में वारे न्यारे हो रहे है। मप्र सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने तो महिने के लाखो रुपए का बजट सिर्फ अपनी अक्खड़ छवि को पब्लिक के बीच लीपा पोती में खर्च करने के लिये लगा दिये है। वही एक पूर्व मंत्री, दोबारा मंत्री पद पाने के लिये, सोशल मीडिया की हर गली की खाक छनवा रहे है। यही हाल लगभग सभी उन नेताओं का है जिनका जमीनी स्तर से पूरी तरह से संपर्क टूट चुका है और जो सोशल मीडिया के नंबरो को देखकर, अपना जनाधार बढ़ाना चाहते है।
अब इन्हे कौन समझाये कि, सोशल मीडिया के एलगोरिदम वाले नंबर, हक़ीकत से कई बार कोसो दूर होते है। लेकिन जब पैसे जनता की ही खून पसीने की कमाई से आए हो …तो उड़ाने में दिक्कत कैसी। तो लगे रहो मुन्नाभाई… करे जाओ पोस्ट पर पोस्ट। बाकी तब तक नेता का तो पता नही लेकिन सोशल मीडिया कंपनियों के तो वारे न्यारे हो ही रहे है।
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