भोपाल। मध्यप्रदेश का जल संरक्षण मॉडल अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में संचालित ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ जनभागीदारी पर आधारित एक सफल जन-आंदोलन के रूप में उभरकर सामने आया है, जिसकी गूंज अब वैश्विक मंचों तक पहुंच चुकी है।

भोपाल स्थित भारत भवन में आयोजित ‘सदानीरा समागम’ में एशिया, यूरोप, उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका और कैरेबियन क्षेत्र के देशों से आए राजनयिकों ने मध्यप्रदेश के जल संरक्षण मॉडल की सराहना की। कार्यक्रम में साइप्रस, फिजी, मेक्सिको, नेपाल, त्रिनिदाद एवं टोबैगो और इक्वाडोर के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और प्रदेश की जल प्रबंधन रणनीतियों को अनुकरणीय बताया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान को जिस प्रकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान और स्वीकार्यता मिल रही है, वह पूरे मध्यप्रदेश के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी पर आधारित यह मॉडल अब राज्य और देश की सीमाओं से आगे बढ़कर विश्व समुदाय के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में जल संरक्षण और जल स्रोतों के पुनर्जीवन के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। इसके तहत अब तक 2 लाख 12 हजार से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण और पुनर्जीवन कार्य पूरा किया जा चुका है। राज्य सरकार का लक्ष्य इस संख्या को बढ़ाकर 3 लाख 66 हजार तक पहुंचाने का है।
डॉ. यादव ने कहा कि नदियों, तालाबों और पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण के लिए चलाया जा रहा यह अभियान जल आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मध्यप्रदेश का यह मॉडल आने वाले समय में दुनिया के अन्य देशों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि जल गंगा संवर्धन अभियान ने न केवल जल संरक्षण के क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम दिए हैं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों को भी इस मुहिम से जोड़कर जनभागीदारी का एक सफल उदाहरण प्रस्तुत किया है। यही कारण है कि अब यह मॉडल अंतरराष्ट्रीय समुदाय का भी ध्यान आकर्षित कर रहा है।
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