पुस्तक : डॉ. मोहन भागवत संदेश
लेखक : कृष्णमोहन झा प्रकाशक : मानक पब्लिकेशन, नई दिल्ली
समकालीन भारत के वैचारिक परिदृश्य में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के विचारों की चर्चा निरंतर होती रही है। राष्ट्र, समाज, संस्कृति, सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों पर उनके विचारों को समझने की दृष्टि से वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक कृष्णमोहन झा की पुस्तक डॉ. मोहन भागवत संदेश’एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में सामने आती है।
इस पुस्तक की विशेषता यह है कि लेखक ने डॉ. भागवत के भाषणों का केवल संकलन नहीं किया है, बल्कि विभिन्न विषयों पर उनके विचारों के आधार पर अपने लेख लिखे हैं। इस दृष्टि से पुस्तक एक विचारशील पत्रकार की दृष्टि से डॉ. भागवत के चिंतन को समझने का प्रयास करती है।
राष्ट्रचिंतन पुस्तक का प्रमुख आधार है, लेकिन लेखक ने राष्ट्र को केवल राजनीतिक अवधारणा के रूप में प्रस्तुत नहीं किया। राष्ट्र के साथ समाज, संस्कृति, संगठन, सेवा और व्यक्ति के दायित्व को जोड़कर देखने का प्रयास किया गया है। यही दृष्टि पुस्तक को व्यापक बनाती है।
पुस्तक में सामाजिक समरसता, युवा, श्रम की प्रतिष्ठा, भारतीय संस्कृति, राष्ट्र निर्माण और संगठन जैसे विषयों को भी स्थान मिला है। इन विषयों के माध्यम से पाठक यह समझ सकता है कि राष्ट्र निर्माण केवल शासन व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि समाज और व्यक्ति की सहभागिता से जुड़ी व्यापक प्रक्रिया है।
पुस्तक का एक उल्लेखनीय पक्ष यह भी है कि लेखक ने अलग-अलग समय और संदर्भों में व्यक्त विचारों को एक व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखने की कोशिश की है। इससे डॉ. मोहन भागवत के विचारों के विभिन्न आयाम सामने आते हैं।
डॉ. मोहन भागवत संदेश’ की उपयोगिता इस बात में है कि यह पाठक को किसी निष्कर्ष को स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं करती, बल्कि विभिन्न विषयों पर प्रस्तुत विचारों को पढ़कर स्वयं विचार करने का अवसर देती है।
डॉ. मोहन भागवत के सार्वजनिक जीवन और विचारों का अध्ययन करने वाले पाठकों के साथ पत्रकारों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए भी यह पुस्तक उपयोगी हो सकती है।
कुल मिलाकर डॉ. मोहन भागवत संदेश’ समकालीन भारत के राष्ट्रचिंतन और सामाजिक विमर्श को समझने की दिशा में कृष्णमोहन झा का एक सार्थक लेखकीय प्रयास है।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार है)
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