राजस्थान में गर्मी शुरू होने से पहले ही पेयजल संकट का खतरा गहराने लगा है। हैरानी की बात यह है कि इस संकट को केवल प्राकृतिक कारणों से नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोपों से भी जोड़ा जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, बीसलपुर पेयजल सप्लाई विस्तार योजना को बड़ा झटका लगा है। करीब 500 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया सूरजपुरा फिल्टर प्लांट प्रोजेक्ट फेल घोषित किया जा चुका है। इसके बावजूद परियोजना से जुड़ी कंपनी को भुगतान किए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं।

बताया जा रहा है कि इस स्थिति का असर आने वाली गर्मियों में करीब दो करोड़ लोगों पर पड़ सकता है। खासकर जयपुर, टोंक, अजमेर और आसपास के क्षेत्रों में पानी की गंभीर किल्लत होने की आशंका जताई जा रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक यह संकट इतना गंभीर हो सकता है कि राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी और उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा के विधानसभा क्षेत्रों में भी पानी की भारी समस्या पैदा हो सकती है।

जांच रिपोर्ट में सामने आईं बड़ी खामियां

जांच में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार:

  • सूरजपुरा फिल्टर प्लांट का डिजाइन बिना अनुमति के बदल दिया गया।
  • कंपनी GCKC ने लागत कम करने के लिए खुद ही डिजाइन में बदलाव कर दिया।
  • प्लांट की निर्धारित 216 एमएलडी (MLD) क्षमता भी पूरी नहीं हो पाई।
  • इसके बावजूद करीब 200 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया।
फिर से टेंडर देने की तैयारी पर सवाल

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अब उसी कंपनी को करीब 350 करोड़ रुपये का नया टेंडर देने की चर्चा चल रही है। यानी जो प्रोजेक्ट पहले ही फेल घोषित हो चुका है, उसी को फिर से अतिरिक्त पैसा देकर ठीक करने की योजना पर सवाल उठ रहे हैं।

इस बीच जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के मंत्री कन्हैया लाल चौधरी ने कंपनी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे। हालांकि अब सवाल उठ रहा है कि क्या प्रशासनिक स्तर पर इन निर्देशों को लागू करने में देरी की जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस मामले में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली गर्मियों में राजस्थान के कई जिलों में पेयजल संकट गंभीर रूप ले सकता है।

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