उज्जैन में एक केमिकल फैक्ट्री में काम कर चुके मजदूरों ने चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। मजदूरों का कहना है कि फैक्ट्री में काम के दौरान जहरीले केमिकल और गैस के संपर्क में आने से उनकी सुनने की क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित हुई है, लेकिन अब तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

पीड़ित मजदूरों के अनुसार, अलग-अलग समय पर फैक्ट्री में काम कर चुके करीब 30 से 35 लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं। इनमें से कई मजदूरों की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि उन्हें बिना मशीन के सुनाई नहीं देता।

मजदूरों का आरोप है कि फैक्ट्री में कीटनाशक दवाइयों का निर्माण होता था और केमिकल रिएक्शन के दौरान निकलने वाली जहरीली गैस और धुआं पूरे परिसर में फैल जाता था। इसके चलते आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी सामने आईं।

सबसे गंभीर बात यह है कि मजदूरों को न तो सुरक्षा उपकरण दिए गए और न ही स्वास्थ्य संबंधी किसी तरह की जानकारी उपलब्ध कराई गई।

पीड़ितों ने बताया कि उन्होंने इस मामले में कई बार प्रशासन से शिकायत की और लेबर कोर्ट में भी मामला लंबित है, लेकिन अब तक उन्हें राहत नहीं मिल सकी है।

एक पीड़ित के अनुसार, उसके परिजन की सुनने की क्षमता 80 से 90 प्रतिशत तक प्रभावित हो चुकी है और उनका दिव्यांग प्रमाण पत्र भी बन चुका है।

मजदूरों का कहना है कि सुनने की समस्या के कारण उन्हें दूसरी जगह काम मिलने में भी दिक्कत होती है और कई बार नौकरी से निकाल दिया जाता है।

अब सभी पीड़ितों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए और प्रभावित मजदूरों को उचित मुआवजा दिया जाए।

वहीं, कलेक्टर रोशन कुमार सिंह का कहना है कि शिकायत प्राप्त हुई है और मामले की जांच की जा रही है। तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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