लखनऊ की प्रतिष्ठित समाजसेवी संस्था ‘सहायता’ ने अपनी वार्षिक धन-संग्रह प्रदर्शनी ‘प्रियदर्शिनी’ का शानदार आगाज किया है। यह प्रदर्शनी न केवल कला और संस्कृति का उत्सव है, बल्कि सामाजिक उत्थान की दिशा में एक बड़ा कदम भी है। दशकों से महिलाओं और बच्चों के विकास के लिए समर्पित यह संस्था इस आयोजन के माध्यम से हस्तशिल्प और समाजसेवा को एक मंच पर लेकर आई है।

महिला सशक्तिकरण और स्वावलंबन पर जोर

संस्था का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाना है। इसी कड़ी में आयोजित इस हैंडीक्राफ्ट प्रदर्शनी में देश के कोने-कोने से आए कारीगरों की कला को प्रदर्शित किया गया है। जामो स्टेट की रानी मधुरीमा सिंह की अगुवाई में यह संस्थान निरंतर गरीब महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य एवं शिक्षा के लिए कार्य कर रहा है। ‘प्रियदर्शिनी’ उन गुमनाम कारीगरों की मेहनत को लखनऊ के कला प्रेमियों तक पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम बनी है।

गणमान्य अतिथियों द्वारा भव्य उद्घाटन

इस विशेष कार्यक्रम का उद्घाटन भातखंडे संस्कृत विश्वविद्यालय की कुलपति मांडवी सिंह द्वारा किया गया। उन्होंने संस्था के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से न केवल हमारी पारंपरिक कलाओं को संरक्षण मिलता है, बल्कि समाज के वंचित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने में भी मदद मिलती है। उद्घाटन समारोह के दौरान संस्था के सदस्य और शहर के कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

जनकल्याण की दिशा में एक सार्थक पहल

प्रदर्शनी ‘प्रियदर्शिनी’ से होने वाली आय का उपयोग पूरी तरह से सेवा कार्यों में किया जाएगा। ‘सहायता’ संस्था इस धन का निवेश अपनी विभिन्न कल्याणकारी परियोजनाओं में करती है, जिसमें बच्चों का पोषण, शिक्षा और महिलाओं का कौशल विकास शामिल है। यह प्रदर्शनी लखनऊ के नागरिकों के लिए खरीदारी के साथ-साथ पुण्य के काम में भागीदारी करने का भी एक बेहतरीन अवसर है।

छह दशकों का सेवा सफर और संस्थान का गौरवशाली इतिहास

​संस्था ‘सहायता’ की नींव वर्ष 1963 में रानी साहेब तिलोई द्वारा रखी गई थी। पिछले 64 वर्षों से यह संस्थान निरंतर समाज के वंचित वर्गों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रहा है। संस्था से रानी भदरी श्रीमती मंजुल राजे समेत 40 रायल फेमली की नारी शक्ति जुडी हैं, जिनमे शोहरतगढ़, शिवगढ, तिलोई, भदरी, जामो आदि सियासतें प्रमुख हैं! ‘प्रियदर्शिनी’ के माध्यम से एकत्रित होने वाली धनराशि का उपयोग गरीब महिलाओं को स्वावलंबी बनाने और गरीब बच्चों की देखभाल हेतु संचालित विभिन्न परियोजनाओं में किया जाता है। जामो स्टेट की रानी मधुरिमा सिंह के कुशल नेतृत्व में यह संस्था आज लखनऊ की एक विश्वसनीय पहचान बन चुकी है।

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