छत्तीसगढ़ सरकार ने खनिज क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता दर्ज की है। वित्तीय वर्ष 2025–26 में राज्य का खनिज राजस्व बढ़कर ₹16,625 करोड़ हो गया, जो पिछले साल की तुलना में 14 प्रतिशत अधिक है और लक्ष्य का लगभग 98% हासिल किया गया है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में यह उपलब्धि पारदर्शिता, तकनीकी नवाचार और मजबूत प्रशासनिक प्रबंधन का परिणाम है। खनिज विभाग के सचिव पी. दयानंद ने कहा कि यह सफलता सुशासन, प्रभावी नीति क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था का प्रत्यक्ष परिणाम है।
पिछले पांच वर्षों की औसत वार्षिक वृद्धि दर केवल 6% थी, लेकिन इस वर्ष यह बढ़कर 14% तक पहुँच गई, यानी पिछली दर से दोगुनी से अधिक। यह साबित करता है कि सरकार द्वारा अपनाए गए सुधारात्मक और तकनीकी उपाय सफल रहे हैं।
वृद्धि के पीछे के मुख्य कारक
- एनएमडीसी और अन्य सार्वजनिक उपक्रमों के डिस्पैच रूट्स का प्रभावी अनुकूलन।
- ‘खनिज 2.0’ जैसे आईटी-आधारित प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से संचालन दक्षता और पारदर्शिता में सुधार।
- आगामी वर्ष में गौण खनिजों को भी खनिज 2.0 प्लेटफ़ॉर्म से जोड़कर पूरे खनन क्षेत्र को डिजिटल और एकीकृत बनाने की योजना।
- वीटीएस, i-Check Gates और ड्रोन निगरानी जैसी तकनीकों का व्यापक उपयोग।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा, “हमारा उद्देश्य खनिज संसाधनों के प्रबंधन में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। इससे न केवल राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि विकास कार्यों के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध होंगे।”
इस उपलब्धि के साथ छत्तीसगढ़ ने खनिज क्षेत्र में राजस्व वृद्धि और तकनीकी सुधार कर पूरे खनन क्षेत्र को सशक्त और पारदर्शी बनाया है। इसे राज्य की खनिज आधारित अर्थव्यवस्था और विकास की दिशा में बड़ी सफलता माना जा रहा है।
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