धार्मिक नगरी उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में वैशाख शुक्ल तृतीया के पावन अवसर पर रविवार तड़के आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला।
प्रातःकालीन बेला में आयोजित भस्म आरती से पूर्व मंदिर के पुजारियों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकालेश्वर का विशेष अभिषेक किया गया। इस दौरान बाबा महाकाल का दूध, दही और घी से विधिवत अभिषेक करने के साथ-साथ आम के ताजे रस से भी आम्र अभिषेक किया गया, जो इस दिन का प्रमुख आकर्षण रहा। आम के रस से किए गए इस अभिषेक ने पूरे मंदिर परिसर को दिव्यता और सुगंध से भर दिया।
अभिषेक के पश्चात बाबा महाकाल का भव्य श्रृंगार किया गया। भगवान को भांग अर्पित कर उनके मस्तक पर चांदी के शेषनाग का अलंकरण किया गया, जिससे उनका स्वरूप अत्यंत मनमोहक और अलौकिक दिखाई दिया। गर्भगृह में विराजित बाबा महाकाल का यह दिव्य रूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा।
इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा परंपरागत रूप से भस्म अर्पित की गई। जैसे ही भस्म अर्पण की प्रक्रिया पूर्ण हुई, पूरा गर्भगृह दिव्य आभा से आलोकित हो उठा। शंखनाद, घंटों की ध्वनि और डमरू की गूंज ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
इस पावन अवसर पर देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। श्रद्धालुओं में अपार उत्साह और आस्था देखने को मिली। मंदिर परिसर में हर ओर “हर हर महादेव” के जयकारे गूंजते रहे।
वैशाख शुक्ल तृतीया के इस विशेष अवसर पर महाकाल दरबार में आयोजित आम्र अभिषेक और भस्म आरती ने न केवल धार्मिक परंपराओं को जीवंत किया, बल्कि श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति से भी भर दिया।
यह आयोजन एक बार फिर उज्जैन को धार्मिक और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में स्थापित करता है, जहां हर पर्व पर आस्था का अद्भुत स्वरूप देखने को मिलता है।
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