मध्यप्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में सोमवार को वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक और बड़ा अध्याय जुड़ गया। Mohan Yadav ने कूनो नेशनल पार्क के क्वारंटीन बाड़े से दो मादा चीतों को खुले जंगल में विमुक्त किया। बाड़े से बाहर आते ही दोनों चीते खुले जंगल की ओर दौड़ पड़े।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मौके पर कहा कि मध्यप्रदेश की धरती ने चीतों को अपने परिवार का हिस्सा बना लिया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में शुरू हुई ‘प्रोजेक्ट चीता’ परियोजना सफलता के साथ लगातार आगे बढ़ रही है और मध्यप्रदेश इस अभियान में रोज नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।

सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज प्रदेश ने देश में “चीता स्टेट” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। वर्तमान में देश में चीतों की संख्या 57 हो चुकी है, जिनमें 54 चीते कूनो नेशनल पार्क में और 3 गांधी सागर अभ्यारण्य में मौजूद हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बोत्सवाना से लाए गए इन चीतों को खुले वातावरण में छोड़कर सह-अस्तित्व और प्रकृति संरक्षण की भावना को मजबूत किया गया है। उन्होंने श्योपुर और चंबल क्षेत्र के लोगों को भी बधाई देते हुए कहा कि स्थानीय लोगों और वन विभाग ने चीतों को परिवार की तरह अपनाया है।

उन्होंने कहा कि यह विश्व की अनूठी घटना है, जहां वन्यजीव, स्थानीय समुदाय और वन विभाग मिलकर इको-सिस्टम को मजबूत कर रहे हैं। सीएम डॉ. मोहन यादव ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, वन विभाग, मेडिकल स्टाफ और सभी अधिकारियों के प्रयासों की भी सराहना की।

फरवरी में बोत्सवाना से लाए गए थे 9 चीते

गौरतलब है कि फरवरी 2026 में बोत्सवाना से 9 नए चीते कूनो नेशनल पार्क लाए गए थे। इनमें 6 मादा और 3 नर शामिल थे। क्वारंटीन और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप ढलने की प्रक्रिया के बाद अब इनमें से 2 मादा चीतों को खुले जंगल में छोड़ा गया है।

वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि बोत्सवाना से आए चीते अधिक जेनेटिक विविधता लेकर आए हैं, जिससे कूनो में स्वस्थ और दीर्घकालिक चीता आबादी विकसित करने में मदद मिलेगी। भविष्य में इन चीतों को गांधी सागर और नौरादेही जैसे अभ्यारण्यों में भी बसाने की तैयारी की जा रही है।

2022 में शुरू हुआ था ‘प्रोजेक्ट चीता’

भारत में ‘प्रोजेक्ट चीता’ की शुरुआत 17 सितंबर 2022 को हुई थी, जब नामीबिया से 8 चीते कूनो नेशनल पार्क लाए गए थे। इसके बाद वर्ष 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते लाए गए। अब बोत्सवाना से आए चीतों के साथ यह परियोजना लगातार विस्तार ले रही है।

‘प्रोजेक्ट चीता’ का उद्देश्य भारत में विलुप्त हो चुकी चीता प्रजाति को पुनर्स्थापित करना, उनकी संख्या बढ़ाना और उन्हें स्वतंत्र वातावरण में विचरण और शिकार के लिए तैयार करना है।

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