HIGHLIGHTS FIRST
- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज यशोभूमि, नई दिल्ली में आयोजित सेमीकॉन इंडिया-2026 में स्वीडिश एवं जापानी प्रतिनिधिमंडलों के साथ वन-टू-वन संवाद किया।
- संवाद में सेमीकंडक्टर एवं इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में निवेश के अवसरों, प्रौद्योगिकी सहयोग तथा संभावित साझेदारियों को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बोले- जनजातीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण और संवर्धन जरूरी
मध्यप्रदेश सरकार जनजातीय समुदायों के पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान, औषधीय वनस्पतियों और वन आधारित लोकज्ञान को संरक्षित करने की दिशा में पहल कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जनजातीय समाज के पास पीढ़ियों से संचित देशज ज्ञान की अमूल्य विरासत है। इसे वैज्ञानिक तरीके से दस्तावेजीकृत कर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है।
इस पहल के तहत प्रदेश के करीब 640 जनजातीय वैद्यों यानी ‘ट्राइबल हीलर्स’ को मास्टर ट्रेनर्स के रूप में तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए जनजातीय अनुसंधान एवं विकास संस्था (टीआरआई), भोपाल को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
जनजातीय ज्ञान का होगा वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजातीय समुदायों के पास प्राकृतिक और औषधीय वनस्पतियों, खेती-किसानी, वन एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा समृद्ध पारंपरिक ज्ञान है। यह ज्ञान लंबे समय से मौखिक परंपराओं के माध्यम से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचता रहा है।
सरकार का प्रयास है कि जनजातीय समाज के अनुभवी बुजुर्गों और पारंपरिक ज्ञानधारकों के अनुभवों को व्यवस्थित रूप से अभिलेखबद्ध किया जाए, ताकि इस ज्ञान को संरक्षित किया जा सके और भविष्य की पीढ़ियां भी इससे परिचित हो सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समुदायों की पारंपरिक ज्ञान-संपदा का संरक्षण उनके हितों के साथ-साथ प्रदेश की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
34 जिलों के 640 ट्राइबल हीलर्स को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य
मध्यप्रदेश के इंदौर, जबलपुर, शहडोल, नर्मदापुरम, रीवा, ग्वालियर-चंबल, भोपाल और उज्जैन संभाग के कुल 34 जिलों से करीब 640 जनजातीय वैद्यों को मास्टर ट्रेनर्स के रूप में नामांकित कर विशेष प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। इस संख्या में आगे वृद्धि की संभावना भी है।
जून 2026 के अंत तक प्रदेश से 101 ट्राइबल हीलर्स के नाम मास्टर ट्रेनर्स की ट्रेनिंग के लिए केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय को भेजे जा चुके हैं। शेष नामों के चयन की प्रक्रिया जारी है।
केंद्र सरकार चला रही राष्ट्रीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम
जनजातीय समुदायों के पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान के दस्तावेजीकरण और संरक्षण के लिए केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के बीच हुए समझौते के तहत ‘नेशनल प्रोग्राम ऑन कैपेसिटी बिल्डिंग ऑफ ट्राइबल हीलर्स’ संचालित किया जा रहा है।
इस राष्ट्रीय कार्यक्रम का लक्ष्य देशभर में जनजातीय समुदायों से जुड़े 5,000 प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स का कैडर तैयार करना है। इसके लिए ऐसे अनुभवी जनजातीय वैद्यों का चयन किया जा रहा है, जो अपने समुदाय में पारंपरिक उपचार पद्धतियों का अनुभव रखते हैं और अन्य लोगों को भी प्रशिक्षित कर सकें।
जड़ी-बूटी से लेकर अस्थि चिकित्सा तक के जानकारों का चयन
राज्य शासन ने संबंधित कलेक्टर्स और जनजातीय कार्य विभाग के जिला अधिकारियों को योग्य ट्राइबल हीलर्स के नाम भेजने के निर्देश दिए हैं। चयनित होने वाले वैद्यों का अनुसूचित जनजाति समुदाय से होना अनिवार्य है। साथ ही उनका अपने समुदाय में स्थापित प्रभाव और दूसरे लोगों को प्रशिक्षित करने की क्षमता भी देखी जाएगी।
प्रशिक्षण के लिए जड़ी-बूटी चिकित्सा, अस्थि चिकित्सा यानी बोन-सेटिंग, प्रसूति सेवा और सर्पदंश उपचार जैसी विभिन्न पारंपरिक विधाओं के जानकारों के नाम मांगे गए हैं।
जनजातीय समुदायों के ज्ञान को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की पहल
मध्यप्रदेश सरकार की इस पहल का उद्देश्य जनजातीय समाज के पारंपरिक ज्ञान को सम्मानपूर्वक संरक्षित करना, उसका व्यवस्थित दस्तावेजीकरण करना और उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है। इसके तहत अनुभवी पारंपरिक वैद्यों को प्रशिक्षण देकर ज्ञान के हस्तांतरण की प्रक्रिया को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अनुसार, जनजातीय समुदायों की प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की परंपरा और सदियों पुराने अनुभव प्रदेश की महत्वपूर्ण विरासत हैं। इनके संरक्षण के लिए सरकार विभिन्न स्तरों पर प्रयास कर रही है।
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