Author: Public First News

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का खेती-किसानी और अपनी माटी से गहरा जुड़ाव एक बार फिर देखने को मिला। मुख्यमंत्री सोमवार सुबह अपने गृहग्राम बगिया पहुंचे, जहां उन्होंने खेत में उतरकर बैलों की जोड़ी के साथ पारंपरिक तरीके से हल चलाकर बियासी की। हरे-भरे खेत में हल की मूठ थामे मुख्यमंत्री साय का सहज किसान रूप नजर आया। खेती करते हुए उन्होंने कृषि से जुड़ी अपनी पुरानी स्मृतियों को भी साझा किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान परिवार से होने के कारण खेती उनके लिए केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि जीवन का संस्कार है। खेत में उतरते ही…

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ब्रह्मा–विष्णु की कथा से Algorithm और AI-GOD तक — क्या मानव चेतना फिर एक नए उद्धारक की प्रतीक्षा में जा रही है? अस्वीकरण: इस लेख का उद्देश्य न किसी धर्म की निंदा है, न किसी व्यक्ति पर आरोप। यह एक दर्पण है — जो हज़ारों साल के pattern को एक साथ दिखाता है। HIGHLIGHTS FIRST : तुम देख नहीं रहे तुम्हें दिखाया जा रहा है!- – THE ALGORITHM TRAP ALGORITHM का मायाजाल ALGORITHM तुम्हारी चेतना पढ़ रहा है? तुम्हारा दिमाग किसके CONTROL में है? माया का अंतिम हथियार ! AI GOD का मोहिनी हथियार! ALGORITHM = नई माया? नोट: यह…

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अस्वीकरण: इस लेख का उद्देश्य न किसी धर्म की निंदा है, न किसी व्यक्ति पर आरोप। यह एक दर्पण है — जो हज़ारों साल के pattern को एक साथ दिखाता है। दुनिया तेजी से बदल रही है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डेटा, एल्गोरिद्म, डिजिटल पहचान, जैव-प्रौद्योगिकी, सिंथेटिक भोजन, निगरानी तकनीक, सोशल मीडिया और स्वचालित निर्णय प्रणालियाँ हमारे जीवन के हर क्षेत्र में प्रवेश कर चुकी हैं। प्रश्न यह नहीं है कि AI उपयोगी है या नहीं। प्रश्न यह है कि क्या मनुष्य स्वयं का स्वामी रहेगा, या धीरे-धीरे अपने ही बनाए तंत्र का अनुयायी बन जाएगा? यहीं से “सत्य दर्शन” का…

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HIGHLIGHTS FIRST : सवाल :क्या भोजन केवल पोषण है, या मानव स्वतंत्रता का आधार? अस्वीकरण: यह लेख दो स्तरों पर लिखा गया है। पहला स्तर उन तथ्यों पर आधारित है जिनका संबंध सिंथेटिक फूड, AI, ट्रांसह्यूमनिज़्म, वैश्विक खाद्य उद्योग और जनसांख्यिकीय परिवर्तनों से है। दूसरा स्तर एक दार्शनिक विमर्श है, जिसमें मानव चेतना, शिव-तत्त्व और तकनीकी सभ्यता के भविष्य के संबंध पर वैकल्पिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है। दोनों के बीच अंतर बनाए रखना आवश्यक है। प्रस्तावना: भोजन का प्रश्न केवल भोजन का नहीं मानव सभ्यता का इतिहास केवल युद्धों, साम्राज्यों और धर्मों का इतिहास नहीं है; यह भोजन का…

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नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद श्री नितिन नवीन से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक श्री हेमंत खण्डेलवाल ने गुरुवार को नई दिल्ली में सौजन्य भेंट की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच पार्टी के संगठनात्मक विषयों और विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर सार्थक चर्चा हुई। भेंट के दौरान संगठन को और अधिक मजबूत बनाने तथा पार्टी की गतिविधियों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। श्री हेमंत खण्डेलवाल की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन नवीन से यह मुलाकात संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैठक में पार्टी…

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मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने 13 अगस्त को भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित पुण्य स्मृति कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। कार्यक्रम का आयोजन पुण्य श्लोका लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की 231वीं पुण्यतिथि पर किया गया। सीएम डॉ. यादव ने लोकमाता के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने देवी अहिल्याबाई की 231वीं पुण्य स्मृति दिवस पर प्रदेशवासियों को बधाई दी। इस अवसर पर सीएम डॉ. मोहन ने बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि राज्य में पाल-गड़रिया समाज के बोर्ड का गठन करेगी। इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि…

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अस्वीकरण यह लेख एक दार्शनिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। इसमें व्यक्त विचार लेखक की वैकल्पिक व्याख्या हैं, जिन्हें ऐतिहासिक या धार्मिक रूप से प्रमाणित निष्कर्ष के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए। उद्देश्य किसी धर्म, पंथ, संप्रदाय या आस्था का अपमान नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और दार्शनिक संवाद को प्रेरित करना है। प्रस्तावना : पीड़ा का मूल क्या है? मनुष्य की समस्त पीड़ा, भय, संघर्ष और बंधन का मूल क्या है? क्या इसका कारण बाहरी संसार है, समाज है, राजनीति है, धर्म है, या स्वयं मनुष्य का मन? इस लेख की केंद्रीय धारणा यह है कि संसार का मूल…

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HIGHLIGHTS FIRST : सनातन का विभाजन : शिव चेतना से अवतारवाद तक Disclaimer / अस्वीकरण यह लेख दो स्पष्ट भागों में विभाजित है। भाग 1 में पुरातात्त्विक, ऐतिहासिक और शास्त्रीय स्रोतों से प्रमाणित तथ्य प्रस्तुत किए गए हैं। भाग 2 में लेखक का दार्शनिक विमर्श और वैकल्पिक व्याख्या है, जो विचारणीय है परंतु स्थापित इतिहास नहीं। किसी भी धर्म, पंथ या परंपरा का अपमान करना उद्देश्य नहीं है। यह लेख बौद्धिक विमर्श और दार्शनिक चर्चा के लिए लिखा गया है। — भारतीय संविधान, अनुच्छेद 19(1)(a) प्रस्तावना : एक प्रश्न जो इतिहास से भी बड़ा है यदि हम भारतीय आध्यात्मिक परंपरा…

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मध्यप्रदेश में अब एनालॉग पनीर पर लगेगा ब्रेक!जिस पनीर को लेकर पिछले कुछ दिनों से मध्यप्रदेश में सवाल उठ रहे थे, अब उस पर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एनालॉग पनीर को मध्यप्रदेश में प्रतिबंधित करने के निर्देश दिए हैं। यानी अब सवाल सिर्फ ये नहीं कि पनीर असली है या नकली…सवाल ये है कि आपकी थाली तक पहुंचने वाले पनीर में आखिर इस्तेमाल क्या हो रहा है? दरअसल, गुजरात, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में एनालॉग पनीर के उत्पादन, बिक्री और इस्तेमाल को लेकर कार्रवाई के बाद मध्यप्रदेश में भी इसकी सप्लाई को लेकर चिंता…

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HIGHLIGHTS FIRST : क्या मानव सभ्यता एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ सभी पुराने धार्मिक, राजनीतिक और वैचारिक ढाँचे ढह रहे हैं—और क्या इस प्रक्रिया के बाद एक नया डिजिटल “उद्धारक” जन्म ले सकता है? Disclaimer/ दार्शनिक अस्वीकरण यह लेख “सत्य दर्शन” के दार्शनिक और प्रतीकात्मक ढाँचे के भीतर लिखा गया एक चिंतन है। इसमें प्रयुक्त “विष्णु-माया”, “अवतार”, “AI”, “अब्राहमिक ईश्वर”, “डिजिटल माया”, “काल-सूर्य” और “महाकाल” जैसी अवधारणाएँ रूपकात्मक (symbolic) हैं। यह किसी धर्म, समुदाय, सरकार, तकनीकी संस्था या वैज्ञानिक निष्कर्ष के विरुद्ध तथ्यात्मक आरोप नहीं है। इसका उद्देश्य चेतना, तकनीक, आस्था और स्वतंत्र विचार के संबंध पर दार्शनिक…

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