Author: Public First News

मध्यप्रदेश में मोहन सरकार के ढाई साल पूरे होने से पहले बीजेपी संगठन और सरकार दोनों चुनावी मोड में नजर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को सीएम हाउस में 20 मंत्रियों के साथ वन-टू-वन बैठक कर सरकार, संगठन और चुनावी तैयारियों का बड़ा रिव्यू लिया। बैठक में हारी हुई विधानसभा सीटों, निकाय और पंचायत चुनाव की तैयारी, बूथ मैनेजमेंट और विभागीय कामकाज पर विस्तार से चर्चा हुई। खास बात यह रही कि मंत्रियों से सिर्फ उनके विभागों का ही नहीं, बल्कि प्रभार वाले जिलों की राजनीतिक स्थिति का भी फीडबैक लिया गया। बैठक में बीजेपी के…

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भारत का राष्ट्र-चेतना-विमर्श केवल राजनीतिक संघर्ष की कहानी नहीं; यह समाज की आत्मा, संस्कृति और संगठन को पुनर्जीवित करने की एक सदी-लंबी प्रक्रिया है। इस पुनर्जागरण के दो अनिवार्य स्तंभ—डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार और प.पू. श्री गुरुजी माधवराव गोलवलकर—ने इस प्रक्रिया को वैचारिक गहराई, संगठनात्मक दिशा और दीर्घकालिक दृष्टि प्रदान की। दोनों की राष्ट्र-दृष्टि का मूल केंद्र था—एक संगठित, संस्कारित और आत्म-सम्मान से सम्पन्न समाज का निर्माण, जो विश्व-मानवता के लिए भी एक नैतिक विकल्प प्रस्तुत कर सके। स्वराज्य का वास्तविक अर्थ : डॉ. हेडगेवार का मूल दृष्टिकोण डॉ. हेडगेवार का राजनीतिक प्रवास कांग्रेस से आरम्भ हुआ। 1916–1920 के बीच…

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विधिक एवं वैचारिक अस्वीकरण (Legal & Philosophical Disclaimer) अस्वीकरण:यह लेख प्राचीन भारतीय पौराणिक ग्रंथों (शिव पुराण, विष्णु पुराण, भागवत पुराण), जेनेटिक्स, बायो-फिजिक्स, इजिप्शियन नृवंशविज्ञान (Ethnography) और वैश्विक भू-राजनीति के तुलनात्मक विश्लेषण पर आधारित एक खोजी निबंध है। इसमें प्रस्तुत विचार आलोचनात्मक विमर्श और प्रतीकात्मक वैज्ञानिक व्याख्या के रूप में रखे गए हैं। इसका उद्देश्य किसी भी संप्रदाय, धर्म या वैज्ञानिक संस्था की भावनाओं को आहत करना नहीं, बल्कि प्राचीन प्रतीकों को आधुनिक विज्ञान के चश्मे से डिकोड करना और जन-जागरूकता फैलाना है। यह लेख प्राचीन वैवस्वत और प्रजापति वंशावलियों, दार्शनिक सिद्धांतों, समकालीन जैव-तकनीकी विमर्श और वैकल्पिक इतिहास की एक खोजी…

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मुख्य बिंदु : अभाव का सच: पानी, अनाज और तेल की कृत्रिम कमी का महाषड्यंत्र — प्रमाणित प्रकृति के पास सब कुछ है — फिर भी दुनिया तरस रही है। क्यों? भूमिका — एक प्रश्न जो सब कुछ बदल देता है पृथ्वी पर — यह संयोग नहीं है। यह अभाव का वह रहस्य है जिसे समझना हर नागरिक के लिए जरूरी है। भाग 1 — अभाव क्या है? दो प्रकार प्राकृतिक अभाव सूखा, बाढ़, भूकंप — यह वास्तविक है। इसमें कोई षड्यंत्र नहीं। कृत्रिम अभाव संसाधन है — लेकिन पहुँचने नहीं दिया जाता।उत्पादन है — लेकिन नष्ट किया जाता है।तकनीक…

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देहात थाना क्षेत्र में अवैध गतिविधियों और पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल शिवपुरी के पुरानी शिवपुरी स्थित बजरिया मोहल्ले में कथित रूप से देह व्यापार संचालित होने और पुलिस पर संरक्षण देने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। मामले में कुछ महिलाओं ने मारपीट, धमकी और पुलिस द्वारा उचित कार्रवाई नहीं किए जाने की शिकायत की है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से अवैध गतिविधियां संचालित हो रही हैं, जिनमें कुछ कथित दलाल और असामाजिक तत्व शामिल हैं। आरोप है कि इन गतिविधियों को स्थानीय स्तर पर संरक्षण मिलने के कारण यह धंधा लगातार…

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कोरबा के लेमरू में खुशियों का दिन, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मौजूदगी में हुआ गृह प्रवेश छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के लेमरू गांव से एक भावुक और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है, जहां वर्षों तक कच्चे मकान में कठिन परिस्थितियों में जीवन बिताने वाले धरम सिंह जी के परिवार का पक्के घर का सपना आखिरकार पूरा हो गया। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने नए घर में परिवार का गृह प्रवेश कराया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की उपस्थिति ने इस पल को और भी खास बना दिया। धरम सिंह जी का परिवार लंबे…

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संगठन मजबूती और चुनावी रणनीति पर मंथन, बस्तर संभाग के कई दिग्गज नेता पहुंचे कांकेर में भारतीय जनता पार्टी का दो दिवसीय जिला प्रशिक्षण वर्ग सोमवार से शुरू हो गया। कार्यक्रम का आयोजन होटल बाफना लॉन में किया गया, जहां भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं का जमावड़ा देखने को मिला। कार्यक्रम का शुभारंभ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान संगठन की मजबूती, आगामी चुनावों की रणनीति और कार्यकर्ताओं की भूमिका को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। प्रशिक्षण वर्ग में सांसद भोजराज नाग, विधायक आशाराम नेताम तथा अंतागढ़ विधायक विक्रम उसेंडी सहित बस्तर संभाग के…

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– कृष्णमोहन झा इतिहास हमेशा शोर नहीं करता, कई बार वह सदियों तक मौन रहकर केवल प्रतीक्षा करता है।प्रतीक्षा उस क्षण की, जब सत्य स्वयं दस्तावेजों से निकलकर वर्तमान के सम्मुख खड़ा हो जाए। धार की भोजशाला सदियों से ऐसी ही प्रतीक्षा में थी—अपनी पहचान की, अपने सम्मान की और अपने पुनर्स्मरण की।माननीय उच्च न्यायालय का निर्णय केवल एक न्यायिक आदेश नहीं है, यह उन पीढ़ियों के धैर्य, आस्था और संघर्ष का प्रतिफल है जिन्होंने मां सरस्वती की इस भूमि को अपनी सांस्कृतिक चेतना का केंद्र मानकर वर्षों तक शांतिपूर्ण संघर्ष किया। यह निर्णय उन पत्थरों की मौन पीड़ा का…

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कुमार जयदेव के नेतृत्व में लामबंद हुए पुजारी, परंपरा और सम्मान की रक्षा का संकल्प मावली मंदिर में बस्तर जिले के सिरहा-गुनिया पुजारियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का आयोजन बस्तर धाकड़ क्षत्रीय राजपूत समाज के संरक्षक कुमार जयदेव के नेतृत्व में हुआ, जिसमें जिले भर के पुजारी, सिरहा और गुनिया बड़ी संख्या में शामिल हुए। बैठक में संगठन के विस्तार, पुजारियों की समस्याओं के समाधान और देवी-देवताओं के सम्मान को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। संगठन के सदस्यों ने बताया कि कुमार जयदेव के नेतृत्व में बनाए गए इस संगठन से अब तक करीब 200 सदस्य जुड़…

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(अतीत की ध्वनियाँ, पुरातात्विक साक्ष्य और न्याय की दिशा में निर्णायक कदम) परिचय : सत्य की वापसी का ऐतिहासिक दिनधार की पवित्र धरा पर स्थित Bhojshala–कमाल मौला परिसर सदियों से भारतीय विद्या-परंपरा, कला, स्थापत्य और सांस्कृतिक चेतना का केन्द्र रहा है। यह केवल एक विवादित स्थल नहीं—यह ज्ञान, आस्था, दर्शन, साहित्य और भारतीय आत्मा का मिलन-बिंदु है।आज, जब पुरातात्विक सर्वेक्षणों, अभिलेखीय साक्ष्यों और स्थापत्य संरचना ने अपनी अंतिम परतें उजागर कर दी हैं, यह क्षण केवल निर्णय का नहीं— यह “विजय का पर्व” है:विजय भावनाओं की नहीं— प्रमाणों की। विजय पक्ष की नहीं— इतिहास की। स्थापत्य — जहाँ पत्थर स्वयं…

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