रायपुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार, श्रृंगी ऋषि पहाड़ी की तराई में ग्रामीणों ने लगभग चार महीने के तेंदुए के शावक को देखा। संभवतः शावक अपनी मां से बिछड़कर रिहायशी इलाके तक पहुँच गया था। ग्रामीणों ने तुरंत वन विभाग को सूचना दी, जिसके बाद विभाग की टीम मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से शावक को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया गया।
वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पाण्डेय के दिशा-निर्देश में, धमतरी जिले के नगरी-सिहावा क्षेत्र अंतर्गत बिरगुड़ी वन परिक्षेत्र के ग्राम छिपली पारा में तेंदुए के शावक का सफल रेस्क्यू किया गया।
रेस्क्यू के बाद शावक को नगरी स्थित पशु चिकित्सालय ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया। जांच में शावक पूरी तरह स्वस्थ पाया गया। रेंज अधिकारी सुरेंद्र कुमार ने बताया कि उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार शावक को आगे की देखभाल और सुरक्षित वातावरण के लिए रायपुर स्थित जंगल सफारी भेजा गया है।
नगरी-सिहावा क्षेत्र की सघन वन्य और पहाड़ी भूमि तेंदुए और अन्य वन्यजीवों के लिए उपयुक्त प्राकृतिक आवास मानी जाती है। वन विभाग की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से न केवल वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित हो रही है, बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष में भी कमी आ रही है। ग्रामीणों की जागरूकता और जिम्मेदारी की भी खुलकर सराहना की गई है।
वन विभाग ने कहा कि अगर स्थानीय लोग इसी तरह सावधानी और संवेदनशीलता दिखाते रहें, तो मानव-वन्यजीव संघर्ष को काफी हद तक रोका जा सकता है। इस घटना से यह साबित हुआ कि सही समय पर सही कदम उठाने से वन्यजीवों की जान बचाई जा सकती है।
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