उत्तर प्रदेश के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में लंबे समय से चली आ रही भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर निदेशक विशाल सिंह (IAS) ने कड़ा कदम उठाया है। विभाग की कमान संभालते ही उन्होंने वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता के प्रति अपने सख्त रुख को लागू किया, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग करने वाले तत्वों में हड़कंप मच गया।

विशाल सिंह ने विभाग के भीतर छिपे उन सारे सुराखों को बंद किया, जिनसे सरकारी खजाने का गलत तरीके से लाभ उठाया जा रहा था। उनका यह कदम उन तथाकथित पत्रकारों और बिचौलियों को नागवार गुजरा, जो लंबे समय से सरकारी धन पर ‘मलाई’ काट रहे थे। सोशल मीडिया पर इन स्वघोषित पत्रकारों ने अधिकारी पर कीचड़ उछालना शुरू कर दिया, लेकिन उनकी हर कार्रवाई का उद्देश्य केवल विभाग में पारदर्शिता और ईमानदारी सुनिश्चित करना रहा।

आईएएस विशाल सिंह का प्रशासनिक रिकॉर्ड गवाह है कि वे जहां भी गए, ईमानदारी और बेबाकी के लिए जाने जाते रहे। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के दौरान हुए अभूतपूर्व कायाकल्प में उनका योगदान भी उल्लेखनीय रहा है। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में उन्होंने अपने तेज-तर्रार नेतृत्व और कड़े प्रशासनिक रुख से पहले से चली आ रही फिजूलखर्ची और बंदरबांट को रोक दिया।

विशाल सिंह की इस पहल ने विभाग की छवि को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके कदम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी धन का दुरुपयोग और मुफ्तखोरी अब नहीं चलेगी। ईमानदारी और पारदर्शिता की इस नीति ने यह संदेश भी दिया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई भी कार्रवाई देर-सबेर सफल होती है।

विशाल सिंह की यह कार्यशैली उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक इतिहास में एक नई मिसाल बन गई है और अन्य विभागों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है।

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