मध्यप्रदेश सरकार ने “मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) 2026” का प्रारूप तैयार कर समानता, न्याय और लैंगिक समानता की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। संविधान के अनुच्छेद-44 की भावना के अनुरूप तैयार किए गए इस ड्राफ्ट का उद्देश्य विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे नागरिक मामलों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है।
सरकार का कहना है कि इस संहिता का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को समान अधिकार देना, पुराने भेदभाव को समाप्त करना और सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। साथ ही धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक रीति-रिवाजों का संरक्षण भी किया जाएगा, बशर्ते वे सार्वजनिक व्यवस्था और नैतिकता के अनुरूप हों।
UCC Draft2026 की बड़ी बातें
1. अनुसूचित जनजातियों को छूट
- संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत सूचीबद्ध अनुसूचित जनजातियों पर यह कानून लागू नहीं होगा।
- जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक अधिकारों को पूर्ण संरक्षण मिलेगा।
2. बहुविवाह पर पूरी तरह रोक
- पूरे प्रदेश में एक समय में केवल एक विवाह ही वैध होगा।
- सभी समुदायों पर समान नियम लागू होंगे।
3. विवाह और तलाक के नए नियम
- पुरुष की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिला की 18 वर्ष।
- मौखिक, जुबानी या अनौपचारिक तलाक अमान्य होगा।
- विवाह और तलाक का पंजीकरण अनिवार्य होगा।
4. महिलाओं को समान अधिकार
- विवाह, तलाक, भरण-पोषण और उत्तराधिकार में महिलाओं को समान कानूनी सुरक्षा।
- पति द्वारा तथ्य छिपाने जैसी परिस्थितियों में पत्नी को विवाह निरस्त कराने का अधिकार।
5. बच्चों के अधिकार
- “अवैध संतान” जैसी अवधारणा समाप्त।
- जैविक, दत्तक, सरोगेसी और ART से जन्मे सभी बच्चों को समान कानूनी दर्जा मिलेगा।
6. उत्तराधिकार में समानता
- बेटा और बेटी दोनों को बराबर अधिकार।
- माता और पिता दोनों प्रथम श्रेणी के उत्तराधिकारी होंगे।
- विधवा और विधुर के अधिकार समान होंगे।
7. वसीयत की स्वतंत्रता
- व्यक्ति अपनी स्वयं अर्जित और पैतृक संपत्ति की वसीयत अपनी इच्छा से कर सकेगा।
8. लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन
- साथ रहने के एक महीने के भीतर पंजीकरण अनिवार्य।
- लिव-इन से जन्मे बच्चों को वैध अधिकार।
- महिला साथी को भरण-पोषण का कानूनी अधिकार।
9. नियम तोड़ने पर दंड
- बिना पंजीकरण लिव-इन पर जुर्माना और जेल का प्रावधान।
- गलत जानकारी देने पर भी कानूनी कार्रवाई होगी।
सरकार का उद्देश्य
सरकार के अनुसार प्रस्तावित समान नागरिक संहिता का लक्ष्य संविधान में निहित समानता, न्याय, गरिमा और विधि के शासन के सिद्धांतों को मजबूत करना है। यह ड्राफ्ट महिलाओं, बच्चों और कमजोर वर्गों को अधिक प्रभावी कानूनी सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, मध्यप्रदेश में प्रस्तावित समान नागरिक संहिता केवल कानून का मसौदा नहीं, बल्कि समान अधिकार, लैंगिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा रही है।
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