7 मई को भारत सरकार ने पाकिस्तान के पहलगाम हमले के जवाब में “ऑपरेशन सिंदूर” शुरू किया। इस अभियान के तहत भारत ने पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाकर तबाह कर दिया। इसके बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत से युद्धविराम की अपील की, और 10 मई को सीजफायर की घोषणा कर दी गई। भारत से बुरी तरह हारने के बावजूद शहबाज शरीफ लगातार बहादुरी की बातें कर रहे हैं और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नकल करने की भी कोशिश कर रहे हैं।……

बुधवार को शहबाज शरीफ सियालकोट के पसरूर आर्मी कैंप पहुंचे। यह वही जगह है, जहां भारतीय सेना ने 10 मई को हमला कर रडार सिस्टम तबाह कर दिया था। वहां मौजूद पाकिस्तानी सैनिकों से मिलने के दौरान शहबाज ने पूरा माहौल एक नाटक जैसा बना दिया। उन्होंने सिर पर टोपी पहनकर एक टैंक के ऊपर चढ़कर भाषण दिया। टैंक के पीछे एक पोस्टर लगाया गया था जिसमें कुछ तस्वीरें थीं। टैंक को घास से ढककर युद्ध का नाटक किया गया था। टैंक पर चढ़ने के लिए लोहे की सीढ़ी का इस्तेमाल किया गया। ……टैंक पर चढ़ने के लिए लोहे की सीढ़ी का इस्तेमाल किया गया। शहबाज शरीफ के साथ पाकिस्तान सेना के प्रमुख असीम मुनीर, वायुसेना प्रमुख और रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ भी मौजूद थे। भाषण के दौरान शहबाज कई बार सैनिकों की पीठ थपथपाते नजर आए।……

अपने भाषण में शहबाज ने पाकिस्तानी सेना की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, “हमसे दुश्मन कई गुना बड़ा था लेकिन आपने उन्हें चुप करा दिया।” हालांकि, उन्होंने भारतीय हमले से हुए नुकसान पर कुछ भी नहीं कहा। .उन्होंने यह भी दावा किया कि आने वाले समय में पाकिस्तानी सेना की बहादुरी पर किताबें और शोध होंगे। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें मौका मिला तो वे सेना की बहादुरी पर खुद भी किताब लिखेंगे।……

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